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दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ, मिशन कर्मयोगी और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में कदम

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दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ, मिशन कर्मयोगी और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में कदम

लखनऊ: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में दीन दयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ में सरकारी, अर्धसरकारी विभागों, संस्थानों के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देकर उन्हें अधिक दक्ष और सक्षम बनाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। इसी क्रम में संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू के संरक्षण, प्रवर अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के मार्गदर्शन और प्रशासनिक नियंत्रण में 3 से 5 नवंबर 2025 तक दो प्रमुख प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।इनमें पहला कार्यक्रम प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों की ज्ञान एवं कौशल दक्षता के लिए “लर्निंग बाई डूइंग” विषय पर आयोजित किया गया है, जिसमें कुल 95 प्रतिभागी शामिल हैं। वहीं दूसरा कार्यक्रम ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ब्लॉक मिशन मैनेजर एवं डिस्ट्रिक्ट मिशन मैनेजर के 102 प्रतिभागियों के लिए “सीबीओ (सीएलएफ, वीओ एवं एसएचजी) का लोकोस पर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन” विषय पर आयोजित किया जा रहा है।मंगलवार को मिशन कर्मयोगी एवं विकसित भारत @2047 के परिप्रेक्ष्य में संस्थान के बुद्धा सभागार में दोनों प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्घाटन महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू की अध्यक्षता में हुआ। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में नाबार्ड के उप महाप्रबंधक भूपेंद्र सिंह और डॉ. स्नेहिल तथा शिक्षा विभाग से वरिष्ठ प्रशिक्षक प्रशांत दूबे उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विषयगत वार्ताकारों ने प्रशिक्षण की प्रासंगिकता, उपयोगिता और उद्देश्यों पर विस्तार से विचार रखे।नाबार्ड के विशेषज्ञों ने ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत लोकोस पर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को तकनीकी दक्षता विकसित करने के उपाय बताए। वहीं शिक्षा विभाग के प्रशिक्षक प्रशांत दूबे ने “लर्निंग बाई डूइंग” कार्यक्रम के अंतर्गत अध्यापकों को व्यवहारिक प्रक्रिया के माध्यम से सिखाया और बताया कि किस प्रकार विद्यार्थी अपने ज्ञान और कौशल में व्यवहारिक दक्षता हासिल कर सकते हैं।अध्यक्षीय उद्बोधन में महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू ने मिशन कर्मयोगी और विकसित भारत @2047 के संदर्भ में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकास की दृष्टि से प्रत्येक कार्य को सकारात्मक और चुनौतीपूर्ण दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अनुशासनबद्ध जीवन शैली ही योग का प्रतीक है, और प्रत्येक स्तर पर नैतिकता तथा मर्यादा का पालन आवश्यक है। समाज को ऐसा होना चाहिए जो गलत कार्यों का विरोध और अच्छे कार्यों का सम्मान करे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करे।कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के डॉ. नवीन कुमार सिन्हा ने किया। आयोजन एवं प्रबंधन में उप निदेशक डॉ. नीरजा गुप्ता, सरिता गुप्ता, सहायक निदेशक डॉ. राज किशोर यादव, डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता, डॉ. सीमा राठौर, राजीव कुमार दूबे, संकाय सदस्य धर्मेंद्र कुमार सुमन, मोहित यादव, विनीता रावत तथा शोध सहायक प्रतिमेश तिवारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर उपेंद्र कुमार दूबे, प्रचार सहायक मोहम्मद शहंशाह सहित संस्थान के अन्य कार्मिकों का सराहनीय योगदान रहा।
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