
फतेहपुर बाराबंकी : कस्बे के जैन सन्मति भवन में भावलिंगी सन्त श्रमणाचार्य विमर्श सागर जी के संघ के सानिध्य में विविध धार्मिक व सामाजिक आयोजन किये जा रहे है। सन्मति भवन में चल रहे आनन्द महोत्सव में शुक्रवार को आचार्य श्री ने भजन के माध्यम से बताया कि हे मनुष्य भगवान अपने अंदर विराजमान है।उसका स्मरण करो। मुशीबत में भी तेरा जीवन फूलों से खिल जाएगा। तू जिसको खोज रहा है वह तुम्हें पल भर में मिल जायेगा। बस तू अपने आपको पहचानों।संसार मे जो भी धन बैभव है, वह सब यही रह जायेगा।तेरे साथ कुछ भी नही जाएगा।
फूल जो सुबह खिलता है वह भी शाम को मुरझा जाता है।इसलिए प्रभु का स्मरण करो।माता पिता और गुरु का आदर करने वाला मनुष्य हमेशा सम्मान पाता है।मुख से कभी ऐसे बोल न बोलो जिससे दूसरों को दुख पहुँचे।हमेशा मीठे व मधुर बोल ही बोलो।यह बोल अनमोल होते है।संसार मे आपको कभी भी कठनाइयों का सामना नही करना पड़ेगा। प्रातः जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन आरती आचार्य श्री के सानिध्य में भक्तमय संगीत के साथ कि गई।
शाम को मंदिर से सन्मति भवन तक आंनद यात्रा निकाली गई।जहाँ पर श्री जी की आरती,गुरु वन्दना की गई। बालिकाओं द्वारा असहायों की सेवा करना ही परमधर्म है का उपदेश देती हुई नाटिका प्रस्तुत की गई।नाटिका देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।और गुरदेव के जयकारों से सन्मति भवन गुंजायमान हो गया।इस मौके पर काफी संख्या में भक्त मौजूद रहे।