
बीबीएयू में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर हुआ विचार गोष्ठी और प्रदर्शनी का आयोजन
लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर आजादी का अमृत काल समिति, राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, नेशनल कैडेट कोर, बाबासाहेब न्याय चेतना समिति और बीबीएयू के संयुक्त तत्वावधान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल उपस्थित रहे। मंच पर यंग लीडर्स फोरम फिक्की उत्तर प्रदेश चैप्टर के अध्यक्ष नीरज सिंह और आजादी का अमृत काल समिति की अध्यक्ष प्रो. शिल्पी वर्मा भी मौजूद थीं।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, बाबासाहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि के साथ हुई। कुलगीत के बाद मंचासीन अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। स्वागत संबोधन नीरज सिंह ने किया, जबकि प्रो. शिल्पी वर्मा ने स्मृति दिवस के उद्देश्य और रूपरेखा पर प्रकाश डाला। मंच संचालन का कार्य डॉ. नरेंद्र सिंह ने संभाला।मुख्य अतिथि बृजलाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की स्वतंत्रता सहज उपलब्धि नहीं थी, बल्कि इसके लिए असंख्य बलिदान और संघर्ष हुए। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल अतीत की कथा नहीं, बल्कि वर्तमान की समझ और भविष्य के मार्गदर्शन का सबसे सशक्त साधन है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत कभी ‘सोने की चिड़िया’ कहलाता था, फिर भी आंतरिक देशद्रोही तत्वों के कारण गुलामी का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर देश के विभाजन के पक्ष में नहीं थे और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने संविधान निर्माण में ऐतिहासिक योगदान दिया। अपने वक्तव्य में बृजलाल ने लाहौर प्रस्ताव, बंगाल विभाजन, दिल्ली समझौता, केशवानंद भारती केस सहित कई ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया और विभाजन के दौरान हुई जनहानि, विस्थापन और त्रासदियों पर विस्तार से चर्चा की।कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन मानव इतिहास की भीषण त्रासदी थी, जिसमें लाखों लोगों ने जान गंवाई। उन्होंने युवाओं से इतिहास को जानने, समझने और भारतीय संस्कृति, भाषा, वेशभूषा तथा स्वदेशी भावना को सहेजने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब विकास प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर हो और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना हर युवा में हो।फिक्की के नीरज सिंह ने कहा कि युवाओं को अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बाज़ जैसी पैनी दृष्टि रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ‘युवा’ युग के वाहक होते हैं और संविधान हमारे मार्गदर्शन का स्रोत है। उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति, निर्यात वृद्धि और कुंभ जैसे सफल आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक दौर में भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखना अनिवार्य है। समानतामूलक समाज के लिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की विचारधारा को अपनाना जरूरी है। उन्होंने बाबासाहेब और राम मनोहर लोहिया की पुस्तक Guilty Men of India’s Partition का हवाला देते हुए युवाओं से एकजुट और प्रेमपूर्ण समाज निर्माण का आग्रह किया।कार्यक्रम के दौरान विभाजन विभीषिका से संबंधित फोटो प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। बृजलाल ने गौतम बुद्ध केंद्रीय पुस्तकालय को पुस्तकें भेंट कीं। अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह, पुस्तक और शॉल भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. शिल्पी वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
