
क्या भारत का राष्ट्रपति किसी प्रधानमंत्री से इस्तीफ़ा दिला सकता है;असदुद्दीन ओवैसी
प्रधानमंत्री के इस्तीफे को लेकर चल रही बहस के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बड़ा और संवैधानिक सवाल उठा दिया है। ओवैसी ने कहा है,
क्या भारत का राष्ट्रपति किसी प्रधानमंत्री से इस्तीफ़ा दिला सकता है?
यह सवाल उन्होंने उस समय उठाया जब कुछ हलकों से यह मांग की जा रही थी कि प्रधानमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। ओवैसी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए संविधान का हवाला दिया और कहा कि प्रधानमंत्री का पद केवल जनता के विश्वास से जुड़ा है, न कि किसी पदाधिकारी की इच्छा से।

ओवैसी ने साफ तौर पर कहा:
भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है। यहां राष्ट्रपति की भूमिका औपचारिक और संवैधानिक है, न कि कार्यपालिका के मुखिया की तरह। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बना रहता है जब तक उसे लोकसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त है। राष्ट्रपति किसी प्रधानमंत्री को न तो बर्खास्त कर सकते हैं और न ही इस्तीफ़ा दिलवा सकते हैं।
उन्होंने इसे लेकर संवैधानिक व्यवस्था की जानकारी न रखने वालों पर भी निशाना साधा।
“कुछ लोगों को लगता है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री से कुछ भी करवा सकते हैं। लेकिन संविधान कहता है कि राष्ट्रपति खुद प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं। ओवैसी
इस बयान से साफ है कि ओवैसी एक तरफ जहां संवैधानिक व्यवस्था को लेकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार पर भी यह दबाव बना रहे हैं कि सत्ता नैतिक जिम्मेदारी से जुड़ी होती है, न कि केवल संख्या बल से।
इस बीच, राजनीतिक गलियारों में ओवैसी के इस बयान की चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने उनके विचार का समर्थन किया है, जबकि सत्तारूढ़ दल के समर्थकों ने इसे एक और “पब्लिसिटी स्टंट” बताया है।
संविधान विशेषज्ञों का भी कहना है कि ओवैसी का सवाल सही है। भारतीय संविधान में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री से इस्तीफ़ा मांग सकते हैं — जब तक कि प्रधानमंत्री खुद इस्तीफ़ा न दें, या लोकसभा में बहुमत न खो दें।
अब देखना यह है कि इस बयान के बाद राजनीति किस दिशा में जाती है। क्या यह संवैधानिक बहस चुनावी मुद्दा बनेगी या फिर यह बयान केवल एक बयान बनकर रह जाएगा?