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महाकुंभ के 2727 करोड़ रुपए घोटाले में सचिवालय का जालसाज गिरोह, शुरू हुई जांच

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लखनऊ :  यूपी सचिवालय में फर्जी अफसर बन व्यापारियों व ठेकेदारों से करोड़ों वसूलने वाला गिरोह दो साल पहले पर्यटन विभाग में हुए 2727 करोड़ रुपये के घोटाले में भी शामिल था। इन आरोपियों ने कुम्भ मेले के लिये डाक्यूमेन्ट्री बनाने, चादर, कम्बल व कई अन्य सामान की सप्लाई का ठेका दिलाने के लिये फर्जी टेंडर निकाले थे। इन ठेकों को दिलाने के नाम पर ही ठगी की गई। पशुपालन व नमक फर्जीवाड़े में जेल में बंद दो आरोपियों और राजस्थान के एक व्यापारी के बयान से यह बात सामने आयी है। इस सम्बन्ध में भी जांच शुरू कर दी गई है

 

13 जून को पशुपालन विभाग में आटे की सप्लाई के नाम पर नौ करोड़ 72 लाख रुपये हड़पने की एफआईआर दर्ज हुई थी। इसकी जांच में ही खाद्य आपूर्ति विभाग में नमक सप्लाई का ठेका दिलाने के नाम पर छह करोड़ रुपये हड़पने का मामला उजागर हुआ। इसमें एफआईआर हुई और इसकी जांच एसीपी स्वतंत्र सिंह कर रहे हैं। एसीपी ने नामजद आशीष राय को जब रिमाण्ड पर लिया तो पूछताछ में कई खुलासे हुए। इसमें ही राज खुला कि वर्ष 2018 में प्रयागराज में हुए महाकुम्भ के आयोजन के कई ठेके दिलाने के नाम पर सचिवालय में सक्रिय इस गिरोह ने भी फर्जीवाड़ा किया। आशीष समेत 12 आरोपी इस समय जेल में है। इनमें सचिवालय के कर्मचारी भी है

फर्जी अफसर इसमें भी बने थे आरोपी

एसीपी स्वतंत्र ने जेल में आशीष राय के बयान लिये और सचिवालय कर्मचारियों से पूछताछ की तो चौंकाने वाली जानकारियां मिली। आरोपी पशुपालन व नमक फर्जीवाड़े की तरह इसमें भी पीड़ितों से फर्जी अफसर बनकर मिले। आलोक मिश्र नाम के शख्स ने खुद को एमडी बता दिल्ली के और अन्य कारोबारियों से मुलाकात की। यह बात पहले ही आ चुकी थी कि दिल्ली के एक कारोबारी को 444 करोड़ रुपये का ठेका दिलाने के लिये छह करोड़ रुपये कमीशन लिया गया। एक महिला की कम्पनी को डाक्यूमेंटी बनाने के लिये ढाई करोड़ रुपये का ठेका दिलाने के लिये 10 लाख रुपये वसूल लिये। इन दोनों को कुछ गड़बड़ लगा तो पर्यटन विभाग से सम्पर्क किया। तब पता चला था कि टेंडर फर्जी थ

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