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चीनी मंत्री का ट्रंप को करारा जवाब।

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चीनी विदेशमंत्री का ट्रंप को करारा जवाब।

Chinese Foreign Minister arrived New Delhi:भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद और राजनीतिक तनावों के बावजूद दोनों देश अपने

संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नए प्रयास कर रहे हैं. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने नई दिल्ली की यात्रा के दौरान कहा कि दोनों देशों को सही रणनीतिक साझेदारी स्थापित करनी चाहिए

और एक-दूसरे को साझेदार मानना चाहिए. इस बयान ने स्पष्ट किया कि बीजिंग और नई दिल्ली दोनों ही द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और सहयोग के नए रास्ते खोजने के इच्छुक हैं.

वांग यी ने अमेरिकी टैरिफ को लेकर डॉ. जयशंकर से कहा कि दुनिया तेजी से बदलाव की तरफ जा रही है. उन्होंने अमेरिका का जिक्र करते हुए कहा कि एकतरफा धौंस-धमकी का सामना कर रहा है. इसके अलावा दुनिया फ्री ट्रेड बिजनेस और अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना कर रही है.

इतिहास गवाह है कि भारत और चीन ने कठिन दौर देखे हैं. जून 2020 की गलवान घाटी की झड़प ने रिश्तों को दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था, लेकिन मौजूदा समय में दोनों देशों की नेतृत्व क्षमता इस बात पर केंद्रित है कि तनाव कम हो और क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर सहयोग के अवसर खोजे जाएं.

लेकिन व्यापार संतुलन लंबे समय से बीजिंग के पक्ष में झुका हुआ है. जयशंकर ने नदी डेटा साझाकरण, सीमा व्यापार, संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर भी बातचीत की. इस तरह के कदम न केवल व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाएंगे बल्कि आपसी विश्वास को भी मजबूत करेंगे. वांग यी का यह बयान भी अहम है कि भारत और चीन, विकासशील देशों के लिए उदाहरण पेश कर सकते हैं. इसका सीधा अर्थ है कि दोनों देश अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर वैश्विक दक्षिण (Global South) के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकते हैं. आतंकवाद विरोध और आर्थिक सहयोग पर अपने विचार साझा करने का अवसर देता है. इस संदर्भ में वांग यी की यात्रा और जयशंकर के साथ उनकी बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एशिया की सामूहिक सुरक्षा और स्थिरता से भी जुड़ी है.

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