
नुसरत भरूचा के महाकाल दर्शन पर विवाद, मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी का कड़ा बयान!
इंडिया Live:अभिनेत्री नुसरत भरूचा के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे “गुनाह-ए-अजीम” करार दिया है। उनके इस बयान के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई है।
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी का कहना है कि इस्लाम में किसी अन्य धर्म की पूजा पद्धति में शामिल होना जायज़ नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि किसी मुस्लिम महिला द्वारा मंदिर जाकर दर्शन करना इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ है और इसे गंभीर धार्मिक अपराध माना जाना चाहिए। उन्होंने नुसरत भरूचा से इस कदम पर पुनर्विचार करने और इस्लामी उसूलों का पालन करने की अपील भी की।
इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। एक वर्ग मौलाना के बयान का समर्थन कर रहा है, तो वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हर नागरिक को अपनी इच्छा से किसी भी धार्मिक स्थल पर जाने का अधिकार है।
कई फिल्मी हस्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस विवाद पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान के आधार पर उसकी निजी आस्था या यात्रा पर सवाल उठाना सही नहीं है। खासकर सार्वजनिक जीवन में रहने वाले कलाकारों के हर कदम को धार्मिक चश्मे से देखना असहिष्णुता को बढ़ावा देता है।

फिलहाल नुसरत भरूचा की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यह मामला एक बार फिर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता बनाम धार्मिक परंपराओं की बहस को सामने ले आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद समाज में ध्रुवीकरण बढ़ा सकते हैं और संवाद व सहिष्णुता की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है।
यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या इस पर कोई संतुलित और संयमित प्रतिक्रिया सामने आती है।