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ईरान और भारत के कितने मधुर संबंध।

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ईरान और भारत के कितने मधुर संबंध।

Indo Iran Relations:मुस्लिम नफरतों में इन संघ वालों ने देश की विदेश नीति का भट्टा बैठा दिया है. जबकि ईरान एक्सपर्ट की माने तो कई बार खुलकर भारत के पक्ष में खड़ा रहा है. सन् 1998 में अटल बिहारी वाजपेई सरकार के समय में जब भारत ने परमाणु बम का प्रक्षेपण किया था. उस समय अमेरिका समेत पूरी दुनिया ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया था. तब ईरान ही मात्र एक ऐसा देश था जिसने भारत को पेट्रोलियम सप्लाई किया था वह भी भारतीय रुपए में बिना अमेरिकी डॉलर के दूसरी तरफ इजराइल भी कारगिल युद्ध के समय में भारत के काम आया‌ था लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इजरायल के हर ग़लत कार्य के लिए उसका समर्थन किया जाए. ग़लत को ग़लत कहना ही पड़ेगा. देश में अवैध अतिक्रमण पर संघ और बीजेपी के लोग बहुत सारे ज्ञान देते हैं लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा इजरायल को अवैध देश घोषित करने पर भी वो सही नज़र आ रहा है. मैं कहना चाहता हूं जो इजरायल के सपोर्ट में हैं उन्हें एक बार इजरायलियों को बसा कर देख लेना चाहिए कि वो आने वाले समय में क्या करता है. जैसे इन ग.द्दारों ने ट्रंप के लिए हवन किया था लेकिन नतीजा ये आया कि ट्रंप ने भारत के लोगों को हथकड़ी लगाकर वापस देश भेजना शुरू कर दिया. चलिए मानते हैं अवैध ढंग से रह रहें थें. निकाल दिया ट्रंप ने सभी भारतीयों को लेकिन उन्हें बीफ जबरन खिलाना और बर्बता के साथ भेजना क्या ये सही था. हालांकि ट्रंप को ईरान की तरह भारतीयों की भावनाओं की कद्र करते हुए उन्हें सम्मान के भेजना चाहिए था. शाकाहारी भोजन का प्रबंध करना चाहिए था. लेकिन जो नफरती तत्व बीफ के नाम पर देश के लोगों की हत्या कर जीव प्रेमी बनते हैं असल में वो जीव प्रेम का ढोंग करते हुए नफरत को उजागर करते हैं. इनकी भावना ट्रंप से भी आहत हो सकती थी लेकिन ये पॉवर के आगे नतमस्तक शुरू से होते चले आए हैं. आज इजरायल और ईरान के बीच युद्ध में कुछ देश के गद्दार देश विरोधी बयान देने वाले ट्रंप का साथ देते हुए ईरान को उल्टा सीधा बोल रहे हैं. क्या ईरान ने भारत पर कोई अभद्रता की. यहां तक कि भारत से ईरान पर अटैक के बाद भी ईरान ने भारत पर कोई अभद्रता नहीं की. विदेशी ब्राह्मण देश की हिस्ट्री थोड़ी न जानेंगे, ईरान और भारतीय शिया समुदाय को सिर्फ़ भारतीय ब्राह्मण भली भांति जानता है. अटल बिहारी सरकार में जब अमेरिका पीछे हटा था तो साथ ईरान आया था.

 

पत्रकार दानिश हसन

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