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बीबीएयू में ‘दीक्षारंभ-2025’ का आयोजन, कुलपति बोले – नौकरी पाने नहीं, देने की सोच विकसित करें युवा

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बीबीएयू में ‘दीक्षारंभ-2025’ का आयोजन, कुलपति बोले – नौकरी पाने नहीं, देने की सोच विकसित करें युवा

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ में नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए छात्र कल्याण अधिष्ठाता टीम की ओर से ‘इंटरेक्शन सह इंडक्शन प्रोग्राम – दीक्षारंभ 2025’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति प्रो. जे.पी. पाण्डेय मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के ट्रस्टी प्रो. पी. कंगासाबापति, डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, डीएसडब्ल्यू प्रो. नरेंद्र कुमार तथा डिप्टी डीएसडब्ल्यू प्रो. तरूणा मंच पर उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। विश्वविद्यालय कुलगीत के पश्चात अतिथियों का स्वागत पौधा और शॉल भेंटकर किया गया। मंच संचालन का कार्य डॉ. तरूणा ने किया।कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि समय का सदुपयोग कर जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास प्रत्येक युवा की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज युवाओं को नौकरी पाने की बजाय नौकरी देने की सोच विकसित करनी होगी, क्योंकि नौकरियां सीमित हैं जबकि उद्यमिता की संभावनाएँ असीमित हैं। उन्होंने भारत के पास मौजूद 125 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश में ऑर्गेनिक उद्यमिता के तेजी से विस्तार का प्रमाण है। प्रो. मित्तल ने पर्यावरण संरक्षण, समावेशी विकास और शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए पंचकोश – अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश – के संतुलन को वास्तविक शिक्षा और समग्र विकास का आधार बताया।मुख्य अतिथि प्रो. जे.पी. पाण्डेय ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान का नहीं बल्कि प्रेरणा का केंद्र है। संघर्ष और चुनौतियाँ ही व्यक्ति को महान बनाती हैं। उन्होंने ‘TEAM – Together Everyone Achieve More’ का सूत्र बताते हुए विद्यार्थियों से कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद आगे बढ़ने की क्षमता विकसित करनी होगी। प्रो. पाण्डेय ने कहा कि भारत को विश्व की प्रथम अर्थव्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है और आत्मबल व सामूहिक प्रयास ही देश को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएंगे।प्रो. पी. कंगासाबापति ने भारत के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का वास्तविक आधार है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उद्यमिता समाज की जरूरतों के समाधान प्रस्तुत कर रही है और यही भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।प्रो. एस. विक्टर बाबू ने विचार की शक्ति पर बल देते हुए कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मानव सभ्यता के विकास की रीढ़ हैं। विचार और विज्ञान का संगम समाज को नई दिशा दे सकता है और युवा पीढ़ी नवाचारपूर्ण सोच के माध्यम से राष्ट्र का भविष्य सुनहरा बना सकती है।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व प्रशासनिक संरचना, योजनाओं, पुस्तकालय एवं प्रयोगशाला सुविधाओं, अनुसंधान के अवसरों और पाठ्येतर गतिविधियों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाना और उन्हें जीवन प्रबंधन, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण, टीम वर्क और नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित करना रहा।कार्यक्रम के अंत में डॉ. तरूणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारी और बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी मौजूद रहे।

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