
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जनता दर्शन में फरियादियों को दिया भरोसा—”हर समस्या का होगा समाधान”
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जनता दर्शन में फरियादियों को दिया भरोसा—”हर समस्या का होगा समाधान”
लखनऊ: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज 7-कालिदास मार्ग स्थित अपने कैंप कार्यालय में आयोजित जनता दर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लोगों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और उन्हें आश्वासन दिया कि हर व्यक्ति की हर समस्या का हरसंभव समाधान किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक फरियादी की शिकायतों का त्वरित, समयबद्ध और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए, और इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उत्पीड़न और भूमि विवादों से संबंधित मामलों को अत्यंत गंभीरता और संवेदनशीलता से निपटाने के निर्देश भी उन्होंने अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो, वहां कठोर कार्रवाई की जाए ताकि पीड़ितों को वास्तविक न्याय मिल सके।जनता दर्शन के दौरान उप मुख्यमंत्री स्वयं फरियादियों के पास जाकर उनसे सीधे संवाद करते रहे। उन्होंने महिलाओं, दिव्यांगजनों, बुजुर्गों की समस्याएं विशेष रूप से प्राथमिकता के आधार पर सुनीं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाधान इस प्रकार हो कि फरियादी को दोबारा किसी कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।जनता दर्शन में जमीन संबंधी विवाद, दुर्घटना मुआवजा, चकबंदी, अवैध कब्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, अतिक्रमण हटवाने, सड़क निर्माण, विद्युत आपूर्ति, अभियुक्तों की गिरफ्तारी और उत्पीड़न जैसे मामलों को लेकर फरियादी पहुंचे थे। इन सभी समस्याओं पर उप मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों से दूरभाष पर बात कर आवश्यक निर्देश दिए।हरदोई, आजमगढ़, अयोध्या, शाहजहांपुर, कौशांबी, संत कबीर नगर, लखनऊ, वाराणसी, गाजीपुर, बस्ती, प्रयागराज, उन्नाव, सीतापुर, अलीगढ़, एटा, सहारनपुर, प्रतापगढ़, मैनपुरी, जालौन, मथुरा, इटावा समेत प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों से आए लोगों ने अपनी समस्याएं रखीं। अधिकांश जमीन विवाद मामलों में उप मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर भेजने और समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की यह पहल प्रदेश के नागरिकों में विश्वास और शासन-प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।
