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मुस्लिमों से देशभक्ति का सबूत मत मांगना, देशभक्ति पर बहस!

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मुस्लिमों से देशभक्ति का सबूत मत मांगना, देशभक्ति पर बहस!

इंडिया Live: हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हुआ, जिसने देशभर में देशभक्ति, पहचान और अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर नई बहस छेड़ दी। इस वीडियो में एक मुस्लिम युवक खुलकर कहता दिखाई देता है कि वह अपने देश की बुराई बर्दाश्त नहीं कर सकता, चाहे वह बुराई किसी भी समुदाय या विचारधारा से क्यों न आए। उसका यह बयान लाखों लोगों ने देखा और कुछ ही घंटों में यह वीडियो चर्चा का केंद्र बन गया।
वीडियो इसलिए खास बन गया क्योंकि आमतौर पर देशभक्ति को लेकर मुस्लिम समुदाय से बार-बार सवाल पूछे जाते रहे हैं। कई बार सोशल मीडिया और राजनीतिक बहसों में यह धारणा बनाई जाती है कि मुसलमानों को अपनी वफादारी साबित करनी चाहिए। ऐसे माहौल में इस युवक का खुला और आत्मविश्वास से भरा बयान कई लोगों के लिए चौंकाने वाला साबित हुआ। उसने साफ कहा कि देश से प्यार किसी धर्म का मोहताज नहीं होता।

इस वायरल क्लिप के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया। एक वर्ग ने कहा कि यह वीडियो उन लोगों के लिए जवाब है जो हमेशा मुसलमानों की देशभक्ति पर शक करते हैं। वहीं दूसरा वर्ग इसे सिर्फ एक व्यक्तिगत राय मानते हुए इस पर जरूरत से ज्यादा राजनीति करने के खिलाफ दिखा। लेकिन इतना तय है कि इस एक वीडियो ने लंबे समय से चली आ रही बहस को फिर से ज़िंदा कर दिया।
कुछ लोगों ने दावा किया कि इस घटना ने हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़ी सोच को झटका दिया है, क्योंकि जिस तरह से एक मुस्लिम युवक ने राष्ट्र के सम्मान की बात की, वह उन धारणाओं के उलट था जो सोशल मीडिया पर बार-बार दोहराई जाती हैं। हालांकि कई हिंदू नागरिकों ने भी इस वीडियो का समर्थन किया और कहा कि देशभक्ति किसी एक धर्म की बपौती नहीं है।
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया — देशभक्ति की परिभाषा कौन तय करता है?
क्या देश से प्यार दिखाने का कोई एक तरीका होता है?
क्या सरकार या समाज को आलोचना से ऊपर रखा जाना चाहिए, या आलोचना भी लोकतंत्र का हिस्सा है?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में राष्ट्रप्रेम और आलोचना साथ-साथ चल सकते हैं। देश से प्यार का मतलब यह नहीं कि उसकी कमियों पर बात न की जाए। लेकिन साथ ही, जानबूझकर देश को नीचा दिखाना और जिम्मेदार आलोचना के बीच फर्क भी समझना जरूरी है — और यही बात इस वायरल वीडियो में कही गई।
इस घटना के बाद कई मुस्लिम युवाओं ने भी सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी और कहा कि वे भारत को उतना ही अपना मानते हैं जितना कोई और नागरिक। वहीं कई हिंदू यूज़र्स ने माना कि समाज में बने कुछ पूर्वाग्रहों पर दोबारा सोचने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, यह वायरल वीडियो सिर्फ एक व्यक्ति का बयान नहीं रहा। यह भारत में पहचान, देशभक्ति और समान नागरिकता पर चल रही बड़ी बहस का प्रतीक बन गया। इसने यह सवाल ज़रूर खड़ा किया कि क्या अब वक्त आ गया है कि देशभक्ति को धर्म के चश्मे से देखना बंद किया जाए।

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