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भाषा विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी और मंडल स्तरीय विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी का भव्य आयोजन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण व नवाचार पर दिया गया विशेष बललखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय

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भाषा विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी और मंडल स्तरीय विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी का भव्य आयोजन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण व नवाचार पर दिया गया विशेष बललखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय

लखनऊ: लखनऊ में सोमवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी और मंडल स्तरीय विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। शैक्षिक नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय परिसर को शोध और विज्ञान के उत्सव में बदल दिया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा रहे, जिन्होंने विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सीडीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. पी.एम.एस. चौहान और सिमैप के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. करुणा शंकर का स्वागत पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर किया अपने स्वागत भाषण में कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि विज्ञान और तकनीक किसी भी राष्ट्र की प्रगति की रीढ़ हैं। विश्वविद्यालय केवल पाठ्य पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शोध और नवाचार के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अनुसंधान के प्रति प्रेरित करते हैं और उन्हें अपने विचारों को मंच देने का अवसर प्रदान करते हैं सीडीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. पी.एम.एस. चौहान ने युवाओं को जीवन में वैज्ञानिक सोच अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं की सीमा तक नहीं है, बल्कि यह सोचने, प्रश्न करने और समाधान खोजने की सतत प्रक्रिया है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे जिज्ञासा को जीवित रखें और विज्ञान को समाज की समस्याओं के समाधान के उपकरण के रूप में देखें।सिमैप के वैज्ञानिक प्रो. करुणा शंकर ने कहा कि निरंतर जिज्ञासा और प्रयोगधर्मिता ही नवाचार की कुंजी है। उन्होंने युवाओं को विफलताओं से न घबराने और प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शोध अब केवल अकादमिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजने का सशक्त माध्यम बन चुका है।संगोष्ठी के दौरान देशभर से आए विषय विशेषज्ञों ने भी विचार रखे। डॉ. श्वेता शर्मा (हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर) ने पर्यावरणीय समस्याओं पर बहुविषयक शोध की आवश्यकता बताई। डॉ. रश्मि दुबे (सीएसजेएम विश्वविद्यालय, कानपुर) ने रसायन विज्ञान के सामाजिक उपयोग पर बल दिया, जबकि डॉ. बिनोदिनी कटियार (डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसी तकनीकों के माध्यम से शोध में नई दिशा तलाशने की जरूरत पर जोर दिया।इस आयोजन के समन्वयक डॉ. अभय कृष्णा व डॉ. डी.बी. सिंह तथा सह-समन्वयक डॉ. तस्लीम जमाल और डॉ. साइमा अलीम रहे। मंडल स्तरीय विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने नवाचार आधारित मॉडलों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिसने अतिथियों को विशेष रूप से प्रभावित किया।कार्यक्रम ने विज्ञान, तकनीक और समाज के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने की दिशा में एक प्रेरक पहल के रूप में अपनी छाप छोड़ी।

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