
स्कूल बचाओ, देश बचाओ के नारे के साथ आम आदमी पार्टी का ऐतिहासिक प्रदर्शन, संजय सिंह बोले– एक भी स्कूल बंद नहीं होने देंगे
स्कूल बचाओ, देश बचाओ के नारे के साथ आम आदमी पार्टी का ऐतिहासिक प्रदर्शन, संजय सिंह बोले– एक भी स्कूल बंद नहीं होने देंगे
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के निर्णय के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में शनिवार को एक ऐतिहासिक और उग्र धरना प्रदर्शन किया। इस जनआंदोलन की अगुवाई पार्टी के राज्यसभा सांसद व यूपी प्रभारी संजय सिंह ने की, जिसमें प्रदेशभर से हज़ारों कार्यकर्ता, शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिक जुटे।धरना स्थल “स्कूल बचाओ, देश बचाओ” और “मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए” जैसे नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने योगी सरकार पर शिक्षा के मंदिरों को बंद करने और गरीब, दलित, पिछड़े तथा अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश का आरोप लगाया।संजय सिंह ने मंच से शंखनाद कर भाषण की शुरुआत करते हुए ऐलान किया कि प्रदेश में एक भी सरकारी स्कूल बंद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “सरकार को जनता के दबाव में 1 किलोमीटर की दूरी और 50 छात्रों की संख्या की शर्तों में आंशिक ढील देनी पड़ी, लेकिन जब तक आखिरी स्कूल के ताले नहीं टूटते, यह आंदोलन जारी रहेगा।”संजय सिंह ने कटाक्ष करते हुए पूछा, “शराब की दुकानें तो 300 मीटर पर खुल सकती हैं, लेकिन स्कूल खोलने के लिए तीन किलोमीटर क्यों चाहिए?” उन्होंने कहा कि यह विरोध केवल किसी नीति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को बचाने का आंदोलन है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हर बंद स्कूल का दौरा करें और देखे कि वह दोबारा खुला या नहीं।पार्टी के यूपी सह प्रभारी और सांसद दिलीप पांडेय ने सरकार को चेताया कि यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर है। उन्होंने कहा, “अगर सरकार को लगता है कि थोड़ी ढील देकर जनता को बहलाया जा सकता है तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी। आम आदमी पार्टी गांव-गांव जाकर यह लड़ाई लड़ेगी।”दिल्ली के विधायक और यूपी सह प्रभारी अनिल झा ने कहा, “भाजपा सरकार की मंशा साफ है—वह गरीब, दलित, आदिवासी और पिछड़े तबकों के बच्चों को शिक्षा से वंचित रखने की योजना बना रही है। लेकिन हम इसे सफल नहीं होने देंगे।” उन्होंने जनता से अपील की कि वे संजय सिंह के नेतृत्व में इस आंदोलन को व्यापक जनआंदोलन बनाएं।प्रदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ महिला प्रकोष्ठ, युवा मोर्चा, शिक्षक संगठन, अभिभावक संघ और विभिन्न सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही। प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन यह संदेश छोड़ गया कि अब यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक निर्णायक संघर्ष की शुरुआत है।
