
लखनऊ में फर्जी दस्तावेज़ बनाकर ठगी करने वाले अभियुक्त मोहम्मद तालिब गिरफ्तार, पुलिस की सक्रियता से उजागर हुआ बड़ा अपराध
लखनऊ में फर्जी दस्तावेज़ बनाकर ठगी करने वाले अभियुक्त मोहम्मद तालिब गिरफ्तार, पुलिस की सक्रियता से उजागर हुआ बड़ा अपराध
लखनऊ: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की जोन पूर्वी अंतर्गत थाना गोमतीनगर पुलिस ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर आम जनता से धोखाधड़ी कर धन ऐंठने वाले वांछित अभियुक्त मोहम्मद तालिब को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने आरोपी को वैशाली ग्रीन अपार्टमेंट, थाना महानगर क्षेत्र से पकड़कर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। पुलिस ने बताया कि आरोपी लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुचित लाभ प्राप्त कर लोगों को भ्रमित कर आर्थिक अपराध कर रहा था।थाना गोमतीनगर पर 03 सितंबर 2025 को वादी दीपक सिंह पुत्र स्वर्गीय लल्लू सिंह, जो प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े हैं, द्वारा तहरीर दी गई। तहरीर के आधार पर मुकदमा संख्या 415/2025 धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस के तहत मोहम्मद तालिब और अनवर असलम के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना उपनिरीक्षक हिमांशु द्विवेदी द्वारा की जा रही थी। पुलिस द्वारा आरोपी की तलाश जारी थी और इसी क्रम में मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने आज आरोपी मोहम्मद तालिब को वैशाली ग्रीन अपार्टमेंट के बेसमेंट से गिरफ्तार कर लिया। अभियुक्त की उम्र लगभग 42 वर्ष बताई गई है और वह फ्लैट नंबर 103, वैशाली ग्रीन अपार्टमेंट, थाना महानगर, लखनऊ का निवासी है।पुलिस ने बताया कि अभियुक्त फर्जी दस्तावेज तैयार कर अनुचित लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से आम लोगों को झांसा देकर धन ऐंठता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके सहयोगी मिलकर लोगों से विश्वास जीतते, फर्जी दस्तावेज तैयार करते और उन्हें धोखे में रखकर आर्थिक अपराध करते थे। पुलिस इस मामले में अभियुक्त के अन्य आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है ताकि गिरोह का पूरा नेटवर्क उजागर किया जा सके। उल्लेखनीय है कि अभियुक्त अनवर असलम को पहले ही 08 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से की गई है। टीम ने कहा कि मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि आम जनता को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लेन-देन से बचना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को देनी चाहिए। गिरफ्तारी में शामिल पुलिस टीम में उपनिरीक्षक हिमांशु द्विवेदी, उपनिरीक्षक मारुफ आलम, उपनिरीक्षक जसीम, कांस्टेबल आकाश यादव और कांस्टेबल अंकुर चौधरी शामिल रहे।यह मामला लखनऊ पुलिस की तत्परता, सक्रियता और जनहित में अपराध नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस की इस कार्रवाई से आम नागरिकों में सुरक्षा का विश्वास बढ़ा है और अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का संदेश गया है। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जांच पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता के साथ की जाएगी तथा दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा दिलाई जाएगी।
