
बीबीडीयू में ‘प्रख्यात व्याख्यानमाला’ का उद्घाटन, कुलपति ने रखा भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास का एजेंडा
बीबीडीयू में ‘प्रख्यात व्याख्यानमाला’ का उद्घाटन, कुलपति ने रखा भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास का एजेंडा
लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शिक्षकों के लिए आयोजित ‘प्रख्यात व्याख्यानमाला’ का उद्घाटन कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल द्वारा किया गया। यह व्याख्यानमाला ‘कमेटी फॉर एमीनेंट लेक्चर सीरीज’ के अंतर्गत आयोजित की जा रही है, जिसके तहत प्रत्येक पंद्रह दिन पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों द्वारा शिक्षकों को संबोधित किया जाएगा। उद्घाटन सत्र में कुलपति ने “भारत का सामाजिक-आर्थिक विकास का एजेंडा” विषय पर व्याख्यान दिया।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब अम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पण से हुई। इसके बाद कुलपति को पौधा और श्रीमद्भागवत गीता भेंट कर सम्मानित किया गया। कमेटी की अध्यक्ष प्रो. शिल्पी वर्मा ने सभी का स्वागत करते हुए व्याख्यानमाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।अपने व्याख्यान में प्रो. मित्तल ने भारत की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन काल में भारत विश्व व्यापार और अर्थव्यवस्था में अग्रणी था। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद की चुनौतियों के बावजूद भारत अब पुनः आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने शिक्षा, कृषि, तकनीकी नवाचार, वैश्विक निर्यात और सरकारी नीतियों को भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास का आधार बताया।उन्होंने विशेष रूप से आठ प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया—हरित क्रांति और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा, एमएसएमई सेक्टर का सशक्तिकरण, शिक्षा के साथ उद्यमिता का समन्वय, जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा, एनआरआई निवेश और आधुनिक तकनीकी जैसे एआई एवं रोबोटिक्स का समावेश। उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी वैश्विक युवा आबादी का 20 प्रतिशत हिस्सा है और यदि यह स्वरोजगार को अपनाए तो भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।कुलपति ने लर्निंग और अर्निंग को एक साथ बढ़ावा देने की बात करते हुए छात्रों को ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी सरकारी पहलों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को चीन या अमेरिका की तरह नहीं, बल्कि शांति, बंधुत्व और भाईचारे पर आधारित मॉडल के रूप में विकसित करना चाहिए।कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर भी कुलपति ने विस्तार से दिया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, प्रॉक्टर प्रो. एम. पी. सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रो. नरेंद्र कुमार सहित विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
