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मुख्यमंत्री योगी का बड़ा आदेश

लखनऊ : यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा एलान करते हुए कहा है कि कोविड संक्रमण के कारण ड्यूटी के दौरान जिन राज्य कर्मचारियों की मृत्यु हुई है उनके परिजनों को पूरा सहयोग किया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने आदेश भी जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित परिवार के प्रति पूरी संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ सहयोग किया जाएगा। उन्होंने अफसरों को आदेश देते हुए कहा है कि अनुग्रह राशि, मृतक आश्रित कनियुक्ति सहित अन्य प्रक्रियाएं तत्काल पूरी की जाएं। इससे जुड़ी कोई भी फाइल लंबित न हो। उन्होंने निर्देश दिया कि मुख्य सचिव द्वारा इस सम्बंध में तत्काल आदेश जारी किए जाएं। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंचायत चुनाव में लगाए गए राज्य कर्मचारियों की मृत्यु के बाद उनके आंकड़ों पर घमासान छिड़ा हुआ है। बता दें कि राज्य के शिक्षक व कर्मचारी संघों ने अफसरों पर मृत हुए शिक्षकों व कर्मचारियों की संख्या में गड़बड़ी करने के आरोप लगाए हैं और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीणों को 25.54 लाख आवास उपलब्ध कराएगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश :  सरकार ने विधानसभा चुनाव 2022 से पहले प्रत्येक ग्रामीण आवासहीन परिवार को घर उपलब्ध कराने की तैयारी की है। सरकार ने आवास प्लस योजना में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 25.54 लाख आवास उपलब्ध कराने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। मई के अंत तक केंद्र से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक प्रत्येक परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में 2011-12 के सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर 14 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। केंद्र ने 2011-12 के सर्वेक्षण में छूटे परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराने के लिए आवास प्लस योजना लागू की है।

इस योजना में प्रदेश के 32.86 लाख पात्र परिवार पाए गए थे। पहले चरण में गत वर्ष  इनमें से 7.32 लाख परिवारों को आवास स्वीकृत कर दिया गया। अब ग्राम्य विकास विभाग ने शेष 25.54 लाख आवास इसी वर्ष स्वीकृत करने के लिए केंद्र को पत्र लिखा है। ग्राम्य विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह मोती ने भी केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री को इस मसले पर पत्र लिखा है।  केंद्र से स्वीकृत मिलने पर यूपी 2022 तक सभी आवासहीन परिवारों को आवास उपलब्ध कराने वाला पहला राज्य बन सकता है। इस योजना में एक आवास के लिए करीब 1 लाख 50 हजार रुपये प्रत्येक परिवार को दिए जाते हैं। इनमें 1.20 लाख आवास के लिए, 18 हजार मनरेगा मजदूरी और 12 हजार शौचालय के लिए दिए जाते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीएपी खाद के लिए सब्सिडी में 140 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीएपी खाद के लिए सब्सिडी में 140 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा डीएपी खाद के लिए सब्सिडी 500 रुपये प्रति बैग से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति बैग करने का निर्णय किया गया है। किसानों को डीएपी की बोरी 2400 रुपये के बजाए अब 1200 रुपये में मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस निर्णय से किसान व्यापक स्तर पर लाभान्वित होंगे। डीएपी खाद की प्रति बोरी सब्सिडी की राशि में कभी भी एक बार में इतनी वृद्धि नहीं की गई है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यह फैसला भी किसान कल्याण के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि प्रधानता भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है। प्रधानमंत्री किसानों की आय को दोगुना करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में यूपी सरकार केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से किसानों के कल्याण व उत्थान के लिए कृतसंकल्पित है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी डीएपी खाद पर सब्सिडी बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने प्रदेश की जनता की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले से किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

महानगरों के बाद छोटे जिलों में कोरोनावायरस हमलावर

लखनऊ : महानगरों के बाद छोटे जिलों में कोरोनावायरस हमलावर है। महानगरों में जहां 85 फ़ीसदी तक एक्टिव केस कम हुए हैं वही छोटे जिलों में यह गिरावट 1 से 40 फ़ीसदी तक है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने इन जिलों में कांट्रैक्ट ट्रेसिंग की टीमें बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।  कोरोनावायरस की चेन महानगरों से शुरू होकर अब गांवों तक पहुंच गई है। अप्रैल माह में जिन जिलों में वायरस का असर तेज था वहां अब तेजी से गिरावट हुई है। लेकिन जिन जिलों में मई माह में संक्रमण बड़ा है वहां अभी भी एक्टिव केस कम नहीं हो रहे हैं। मई माह के आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे हैं। लखनऊ में 1 मई को 41042 केस थे, जो अब  8855 पर आ गए हैं।

इसी तरह कानपुर नगर 17042 से घटकर 2766 केस, प्रयागराज में 12758से घटकर 1914 और वाराणसी में 14971से घटकर 5565 केस हो गए हैं। इससे अलग छोटे जिलों की स्थिति देखी जाए तो यहां पहले सबसे कम मरीज मिल रहे थे। लेकिन अब मरीजों के मिलने की गति बढ़ गई। इस वजह से यहां एक्टिव केस मैं उस गति से कमी नहीं आई है, जैसा कि महानगरों में देखने को मिली। उदाहरण के तौर पर हाथरस में 1 मई को 455 एक्टिव के थे और अब 357, श्रावस्ती में 963 की जगह 478 है। इसी तरह अंबेडकरनगर में 953थे, जबकि अभी 805 बरकरार हैं। इससे स्पष्ट है कि इन छोटे जिलों में पॉजिटिव मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है।इस वजह से यहां एक्टिव केस में उस अनुपात में गिरावट नहीं हुई है जैसा कि बड़े शहरों में देखने को मिला है।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ डीएस नेगी ने बताया कि जिन जिलों में लगातार मरीज मिल रहे हैं और एक्टिव केस कम नहीं हो रहे हैं वहां अलग से मॉनिटरिंग की जा रही है। इन जिलों में कांट्रैक्ट ट्रेसिंग टीमें बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। यह जिले छोटे हैं ऐसे में यहां हर व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। सप्ताह भर की स्थिति देखने के बाद दोबारा समीक्षा की जाएगी। उसी हिसाब से अगली रणनीति बनेगी।

जिन जिलों में संक्रमण की दर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है वहां पीक का दौर निकल चुका है। ऐसे में उन जिलों में मरीजों की संख्या भी कम हो गई है। लेकिन जिन जिलों में धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ा है और पीक दर में आया है वहां अभी भी एक्टिव केस ज्यादा हैं। महानगरों में संक्रमण बढ़ने के बाद तमाम लोग गांव गए हैं। जिन छोटे जिलों में अभी भी एक्टिव केस हैं, वहां की स्थिति देखें तो यह बात सामने आती है कि उन गांव में बाहर से आने वाले लोग भी देर से पहुंचे हैं। स्वाभाविक है कि वहां संक्रमण देर से पहुंचा है तो देर तक रहेगा। लेकिन मई माह के अंत तक सभी जिलों में एक्टिव केस का ग्राफ 500 से नीचे आने की उम्मीद है। लखनऊ में एक्टिव केस इसलिए भी ज्यादा रहेंगे क्योंकि यहां आस-पास के जिलों के भी लोग रहते हैं।

लगभग 450 बाजारों को अब धीरे-धीरे व सुरक्षा के साथ खोले जाने की मंशा जताई

 

लखनऊ : राजधानी के व्यापारियों ने हजरतगंज, अमीनाबाद, चौक, आलमबाग, नाका, महानगर, भूतनाथ, पत्रकारपुरम सहित लगभग 450 बाजारों को अब धीरे-धीरे व सुरक्षा के साथ खोले जाने की मंशा जताई है। उनका कहना है कि सरकार अब कोरोना कर्फ्यू को खत्म कर सख्त नियमों के साथ बाजार खोलने का आदेश दे। औद्योगिक इकाइयां, ट्रांसपोर्ट, प्राइवेट कंपनियों के कार्यालय खुले हैं, लेकिन इनका मकसद तब तक पूरा नहीं होगा जब तक बाजार नहीं खुलेंगे। कारोबारियों ने खुद ही 13 अप्रैल को सभी बाजारों को बंद करा दिया था। सरकार ने तो कर्फ्यू की घोषणा बाद में की। अब 37 दिन गुजर चुके हैं और संक्रमण भी घटने लगा है। इसलिए कपड़ा, लोहा, सीमेंट, सेनेटरी, सराफा, इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल्स, स्टेशनरी आदि ट्रेड के बाजार का खुलना जरूरी है।

इन समस्याओं से घिरे

 मकान, दुकान का भरना है किराया

बिजली, टेलीफोन बिल की देनदारी

बिजनेस लोन की किस्त का दबाव

कंपनियों को भुगतान का दबाव

चोरी छिपे चल रहीं व्यापारिक गतिविधियां

लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्र का कहना है कि बाजार अब खुलने ही चाहिए, क्योंकि लगभग सारी गतिविधियां चोरी-छिपे चल रही है। कुछ ट्रेड की दुकानें बंद करने से करोना कंट्रोल होगा, यह बात गले नहीं उतर रही है। पहले भी सरकार ने कोई सुविधा व्यापारियों को नहीं दी। इस वर्ष भी बंद दुकानों के बिल व्यापारियों को दिए जा रहे हैं। बाजार खुलेंगे, खरीदार आएंगे तो कारोबारी की इनकम होगी।

हजरतगंज ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन चंद बंबानी ने कहा कि कोरोना जब बेकाबू हो गया था तो कारोबारियों ने सुरक्षा के लिहाज से स्वेच्छा से बाजार बंद कर दिए थे। लगभग सवा महीने से कारोबारी घर में बैठे हैं। अब हालात भी काबू में आ गए है। इसलिए कारोबारियों को भी कारोबार करने का मौका मिलना चाहिए।

अमीनाबाद संघर्ष समिति के संयोजक विनोद कुमार अग्रवाल का कहना है कि कोरोना ने तमाम व्यापारियों के परिजन व उनके सगे संबंधियों को छीन लिया है। घर में बैठे कारोबारी को डिप्रेशन ने घेर लिया है। अब कोरोना के केस कम हो रहे हैं तो बाजार खुलने चाहिए, भले ही छह घंटे दुकानें खुलें। इससे कारोबारी कंपनियों से आने वाले माल को दुकान में रख सकेगा और कुछ व्यापार भी कर पाएगा।

उत्तर प्रदेश कपड़ा व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अशोक मोतियानी ने कहा कि व्यापारी की मांग पर कर्फ्यू लगा था। उस वक्त करोना पीक पर चल रहा था। अब काफी हद तक हालात सुधर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों में भी केस बहुत कम बताए जा रहे हैं। हमें अभी भी किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं करनी है। बाजार खुले तो पूरी सावधानी के साथ। क्योंकि भविष्य में हमें लखनऊ को करोना मुक्त बनाना है।

अध्यक्ष नाका व्यापार मंडल सतपाल सिंह मीत का कहना है कि बाजारों को बंद हुए एक महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। कोरोना संक्रमण की रफ्तार भी घटी है। अस्पतालों में ऑक्सीजन, दवाइयों का और बेड का इंतजाम भी है। अब समय आ गया है कि बाजारों को चरणबद्ध तरीके से खोला जाए। साप्ताहिक बंदी को लागू रखना चाहिए जो पूरे लखनऊ की एक ही दिन हो।

अध्यक्ष भूतनाथ व्यापार मंडल देवेंद्र गुप्ता बंदी की पहल व्यापारियों ने ही की थी। इसके बाद सरकार ने लॉकडाउन लगाया। इसका असर भी हुआ। कोरोना के केस में भारी कमी आई है। व्यापारी सवा महीने से घर बैठकर जमापूंजी खा रहा है। अब समय आ गया है कि बाजार खुलें भले ही दुकानें खोलने का समय कम कर दें। व्यापारी बिना मास्क कारोबार नहीं करेंगे।

अध्यक्ष स्टेशनरी विक्रेता एवं निर्माता एसोसिएशन उ.प्र. जितेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि संक्रमण भी कम हुआ, खुद समझदारी से। अपने स्टॉफ, कस्टमर और दुकानदारों को बाजार खुलने पर सावधानी से व्यापार करने को प्रेरित करेंगे। विशेष सतर्कता से सुरक्षित व्यापार करने की सलाह देंगे। वैसे भी स्टेशनरी ट्रेड के व्यापार की बात करे तो वो बहुत नहीं होना है।

प्रदेश अध्यक्ष इंडियन बुलियन एवं ज्वैलर्स एसोसिएशन उ.प्र. अनुराग रस्तोगी ने कहा कि कोरोना को मात देने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग एक मजबूत हथियार है। इसका एहसास चौक के सराफा कारोबारी कर रहे हैं, जिन्होंने 14 अप्रैल को बंदी की और उनके साथी स्वस्थ और सुरक्षित हैं। अब बाजार खुलने चाहिए, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन होना चाहिए। यह बहुत जरूरी है।

भाजपा नेता पप्पू सिंह परास का कोरोना से निधन

 

लखनऊ : कम समय में ही जिले की सियासत में अपना अलग स्थान बना चुके और हाल ही में भाजपा में शामिल हुए पप्पू सिंह परास का निधन हो गया है। कोरोना संक्रमित होने के बाद वह करीब एक महीने से लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन से जिले में शोक की लहर है। मिली जानकारी के मुताबिक, इन्द्र बहादुर सिंह (48 वर्ष) उर्फ पप्पू सिंह परास करीब एक महीने से अस्वस्थ चल रहे थे, जिनका इलाज लखनऊ स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा था। परिजनों के काफी प्रयास व महीनों तक मौत से संघर्ष करने के बाद उन्होंने गुरुवार रात अन्तिम सांस लेकर इस दुनिया को छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि पप्पू सिंह परास जिला पंचायत सदस्य की सीट पर लगातार काबिज रहे।

उन्होंने अपनी अति सहज कार्यशैली से दो बार बेलसर ब्लाक के प्रमुख पद पर अपना वर्चस्व कायम किया। उनके आसामयिक निधन के बाद जिले में दूसरे राजनीतिक रसूख का अंत माना जा रहा है। पप्पू सिंह परास के असामयिक निधन से पूरे जिले में शोक की लहर व्याप्त है । वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पप्पू परास बसपा के तरबगंज से चुनाव लड़े थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटी और एक बेटा है। बेटा मयंक, पुणे से एमबीबीएस कर रहा है। पत्नी नीलम सिंह बेलसर की ब्लाक प्रमुख रह चुकी हैं।

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