
लखनऊ: शियों के सातवें इमाम हजरत मूसा काजिम अलैहिस्सलाम की शहादत के मौके पर रविवार को शहर के तमाम इमामबाड़ों, कर्बलाओं और घरों में मजलिस-ओ-मातम के आयोजन के साथ इमाम के ताबूत की जियारत भी करायी गयी।

वहीं शहर की अंजुमनों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी करके इमाम की शहादत का गम मनाया। इस गम में लोगों ने काले लिबास पहने व काले झंडे लगाये। इस दौरान पुराने शहर के इलाकों में ‘अस्सलाम अलैका या मूसी-ए-काजिम, सैयदी मौला, सैयदी मौला’ की सदाएं गूंजती रही। इसी क्रम में छोटा इमामबाड़ा हुसैनाबाद में ‘असीर-ए-बगदाद का मातम’ शीर्षक से आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कल्बे सादिक खां ने कैदखाने में इमाम पर गुजरी मुसीबतों को बयान किया तो अकीदतमंदों की आंखों से आंसू टपकने लगे। मजलिस के बाद हजरत इमाम मूसा काजिम (अ.स.) और हजरत अबु तालिब (अ.स.) के ताबूत की जियारत करायी गयी व पुले बगदाद का दिलसोज मंजर पेश किया गया। जिसे देखकर अजादारों की आंखों से जारो-कतार आंसू निकल पड़े। कार्यक्रम का आयोजन खादिमाने इमामे मूसा काजिम (अ.स.) ने किया था।