
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की बड़ी कार्रवाई, पारा और बाजारखाला के दो मनबढ़ छह माह के लिए किए गए जिलाबदर
लखनऊ: राजधानी लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट प्रशासन ने अपराध और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए सख्त कदम उठाया है। सोमवार को पुलिस आयुक्त के न्यायालय से जारी आदेश के तहत थाना पारा और बाजारखाला क्षेत्र के दो मनबढ़ और दबंग प्रवृत्ति के व्यक्तियों को आगामी छह माह के लिए लखनऊ की सीमा से निष्कासित (जिलाबदर) कर दिया गया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम 1970 की धारा 3 के तहत की गई है।
न्यायालय में वाद संख्या 140(23)/2025 और 148(24)/2025 से संबंधित सुनवाई के दौरान दोनों अभियुक्तों की ओर से उनके अधिवक्ता ने पक्ष रखे, जिनका राज्य की ओर से उपस्थित संयुक्त निदेशक अभियोजन अवधेश कुमार सिंह ने कड़े शब्दों में विरोध किया। पत्रावली के अभिलेखों के अध्ययन और दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि विपक्षीगण का आपराधिक इतिहास गंभीर है और उनकी गतिविधियाँ लोक शांति के लिए खतरा बनी हुई हैं। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के तर्कों से सहमत होते हुए अभियुक्तों को ‘गुण्डा’ घोषित कर लखनऊ की सीमा से छह माह के लिए बाहर किए जाने का आदेश सुनाया।जिन व्यक्तियों को जिलाबदर किया गया है, उनमें पहला नाम थाना पारा क्षेत्र के अभय शर्मा पुत्र रजनीश शर्मा, निवासी 67/05 पुरानी काशीराम कॉलोनी का है। अभय शर्मा के विरुद्ध थाना पारा में कई गंभीर धाराओं जैसे 323, 504, 506 भा.दं.सं. और बीएनएस की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज हैं। दूसरा नाम बाजारखाला क्षेत्र के बाबूल चौराहा निवासी आकाश गुप्ता उर्फ छंगा पुत्र स्व. गुड्डू उर्फ सुरेंद्र का है, जिसके विरुद्ध विभिन्न थानों में लूट, मारपीट, धमकी और तोड़फोड़ जैसे मामलों में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों व्यक्तियों की आपराधिक प्रवृत्ति समाज में भय और अशांति पैदा कर रही थी। ऐसे में लोक शांति बनाए रखने के लिए उन्हें लखनऊ की सीमा से निष्कासित किया जाना आवश्यक है। आदेश खुले न्यायालय में दिनांक 27 अक्तूबर 2025 को पारित किया गया।लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई शांति व्यवस्था कायम रखने और असामाजिक तत्वों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस भविष्य में भी ऐसे अपराधियों के विरुद्ध इसी प्रकार कठोर कदम उठाती रहेगी ताकि आम नागरिकों में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बना रहे और समाज में भयमुक्त वातावरण कायम हो सके।
