
मायावती ने स्कूलों के युग्मन के नाम पर हो रही सरकारी स्कूलों की बंदी को बताया गरीब-विरोधी, फैसले की वापसी की मांग की
मायावती ने स्कूलों के युग्मन के नाम पर हो रही सरकारी स्कूलों की बंदी को बताया गरीब-विरोधी, फैसले की वापसी की मांग की
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों के युग्मन और एकीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों को बंद करने के निर्णय को गरीबों के बच्चों की शिक्षा के साथ अन्याय करार दिया है। उन्होंने इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है।मायावती ने कहा है कि बेसिक शिक्षा परिषद के तहत संचालित प्राथमिक विद्यालयों को एकीकृत करने की प्रक्रिया पहली नज़र में ही अनुचित, अनावश्यक और गरीब-विरोधी प्रतीत होती है। यह व्यवस्था ग्रामीण और शहरी गरीबों के करोड़ों बच्चों के लिए उनके घरों के पास मिलने वाली सस्ती और सुगम शिक्षा को छीनने जैसा है।उन्होंने सरकार से अपील की है कि गरीब छात्र-छात्राओं के व्यापक हित में इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार कर इसे वापस लिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि अगर भविष्य में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनती है, तो इस फैसले को रद्द कर प्रदेश में पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू किया जाएगा।मायावती ने उम्मीद जताई है कि उत्तर प्रदेश सरकार गरीबों और आमजन की शिक्षा के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को बदलने के बारे में अवश्य सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।सरकारी स्कूलों के युग्मन को लेकर प्रदेश में लगातार राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई विपक्षी दल इसे शिक्षा का निजीकरण और ग्रामीण बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश बता रहे हैं। अब बसपा सुप्रीमो के इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है।
