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श्रृंगवेरपुर में विकसित हो रहा निषादराज पार्क, योग-ध्यान और संस्कृति का बनेगा केंद्र

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श्रृंगवेरपुर में विकसित हो रहा निषादराज पार्क, योग-ध्यान और संस्कृति का बनेगा केंद्र

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा पौराणिक महत्व वाले स्थलों के संरक्षण और विकास के क्रम में श्रृंगवेरपुर में भव्य निषादराज पार्क का निर्माण किया गया है, जो धार्मिक आस्था, योग, ध्यान, कला और ग्रामीण पर्यटन के समन्वय का अद्वितीय उदाहरण बनने जा रहा है। यह वही ऐतिहासिक स्थल है, जहां त्रेतायुग में भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण को वनवास काल के दौरान निषादराज ने गंगा पार करवाई थी और आतिथ्य प्रदान किया था। इस घटना को श्रीराम और निषादराज की अमिट मित्रता का प्रतीक माना जाता है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह पार्क केवल धार्मिक पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि पर्यटकों को ध्यान, योग और सांस्कृतिक अनुभवों का अवसर देने वाला जीवंत केंद्र बनेगा। पार्क परिसर में फूडकोर्ट, आर्ट गैलरी, बच्चों के खेलने की जगह, हराभरा प्राकृतिक वातावरण और ध्यान-योग केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं, जो आगंतुकों को आध्यात्मिकता और शांति का विशेष अनुभव प्रदान करेंगी।निषादराज पार्क का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। निजी संचालक को पार्क के रख-रखाव, भोजन, योग-ध्यान केंद्र और अन्य सेवाओं की गुणवत्ता व शुद्धता सुनिश्चित करनी होगी। योग एवं ध्यान केंद्र में पर्यटक विशेष पैकेज के तहत मेडिटेशन और योगाभ्यास कर सकेंगे। इन गतिविधियों में ऑडियो-विजुअल माध्यमों का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे जागरूकता और आकर्षण दोनों को बढ़ावा मिल सके।मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि निषादराज पार्क रामायण सर्किट का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह स्थल धर्म, योग, कला, ग्रामीण जीवन और भारतीय व्यंजनों में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। श्रृंगवेरपुर को पर्यटक गांव के रूप में भी विकसित किया गया है, जिससे ग्रामीण पर्यटन को नई ऊर्जा मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।पार्क के प्रथम चरण के तहत भगवान श्रीराम और निषादराज की 56 फीट ऊंची भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जो सामाजिक सौहार्द्र और सांस्कृतिक समरसता का संदेश देती हैं। मंत्री ने आशा जताई कि इस पहल से धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूती प्राप्त होगी।

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