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अयोध्या मस्जिद ट्रस्ट में सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

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लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मस्जिद के निर्माण के लिए गठित अयोध्या मस्जिद ट्रस्ट में सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। यह याचिका हिंदू पक्ष के एक वकील करुणेश शुक्ला ने अपने वकील विष्णु जैन के माध्यम से दायर की थी।

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या में आवंटित भूमि पर एक मस्जिद और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए एक 15 सदस्यीय ट्रस्ट ‘इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन’ बनाया है।

अयोध्या-बाबरी मस्जिद भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 9 नवंबर को केंद्र सरकार को अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए स्थल सौंपने का निर्देश दिया था और उसी के लिए एक ट्रस्ट बनाया था। शीर्ष अदालत ने सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में एक प्रमुख स्थान पर वैकल्पिक पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया था।

बोर्ड द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, “बाबरी मस्जिद मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के धनीपुर में 5 एकड़ भूमि आवंटित की थी और बोर्ड ने इस साल फरवरी में इसे स्वीकार कर लिया था। बोर्ड ने मस्जिद और आम जनता के लाभ के लिए अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए ‘इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन’ नामक एक ट्रस्ट बनाया है।”

ट्रस्ट में अधिकतम 15 ट्रस्टी होंगे। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड इसका संस्थापक ट्रस्टी होगा। वहीं, जफर अहमद फारुकी मुख्य ट्रस्टी यानी अध्यक्ष होंगे।

फरवरी में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में मस्जिद के निर्माण के लिए प्रदान की गई पांच एकड़ जमीन को स्वीकार कर लिया। इसके अलावा ट्रस्ट एक धर्मार्थ अस्पताल, सार्वजनिक पुस्तकालय और भारत-इस्लामी सभ्यता की विरासत को प्रदर्शित करने वाला एक केंद्र भी बनाएगा।

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