
फर्जी सीआरपीएफ इंस्पेक्टर बनकर करता था ठगी, काकोरी पुलिस ने दबोचा—वर्दी, मोहरें और कार बरामद
लखनऊ: राजधानी लखनऊ की काकोरी पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है जो खुद को सीआरपीएफ का इंस्पेक्टर बताकर बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देता था और उनसे मोटी रकम वसूलता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से फर्जी पहचान पत्र, सीआरपीएफ की वर्दी, सरकारी मोहरें, इंक पैड, पेन और एक कार बरामद की है। आरोपी कई लोगों से भर्ती के नाम पर धोखाधड़ी कर चुका था। घटना का खुलासा तब हुआ जब रेवरी निवासी रामकुमार उर्फ बब्लू ने थाना काकोरी में शिकायत दर्ज कराई कि एक व्यक्ति ने उनकी पुत्री को सीआरपीएफ में भर्ती कराने का झांसा देकर पैसे की मांग की और फर्जी एडमिट कार्ड सौंपा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता से जांच शुरू की और मुकदमा संख्या 407/25 धारा 318(4)/338/336(3)/340(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया।पुलिस की टीम ने शनिवार रात करीब 11 बजे रेवरी टोल प्लाजा के पास घेराबंदी कर आरोपी आलोक कुमार पुत्र रामकुमार, निवासी ग्राम बोडेपुर, पोस्ट किन्हूपुर, थाना खंडासा, जनपद अयोध्या को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह खुद को सीआरपीएफ का इंस्पेक्टर बताकर लोगों को विश्वास में लेता था। भर्ती कराने के नाम पर रकम मांगता और वर्दी पहने हुए अपनी तस्वीरें भेजकर लोगों को विश्वास दिलाता था।पुलिस ने जब आरोपी की i-20 कार (UP 32 NM 8308) की तलाशी ली तो डिग्गी से सीआरपीएफ की वर्दी (3 स्टार के साथ नेम प्लेट), तीन नकली मोहरें—मिनिस्ट्री ऑफ डिफेन्स, हेड कमांडेंट सीआरपीएफ, भारत सरकार—एक इंक पैड, लाल और हरे रंग के पेन, और एक फर्जी आईडी कार्ड बरामद हुए। आरोपी ने बताया कि इन्हीं मोहरों का इस्तेमाल कर वह फर्जी एडमिट कार्ड तैयार करता था और भोले-भाले लोगों से पैसे ठगता था।काकोरी पुलिस ने आरोपी आलोक कुमार के विरुद्ध विधिक कार्यवाही पूरी कर उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया।इस गिरफ्तारी में प्रभारी निरीक्षक सतीश राठौर, उपनिरीक्षक मोबिन अली, उपनिरीक्षक सचिन कुमार और कांस्टेबल देवांग खोखर की विशेष भूमिका रही। काकोरी पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की है।
