
SIR बना Modi सरकार के गले की हड्डी!
India Live:दिल्ली में आज राजनीतिक माहौल बेहद गर्म दिखाई दिया। संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह एक ही मुद्दे ने हलचल मचा रखी है—*SIR मोदी सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया है*। जैसे-जैसे यह मामला आगे बढ़ रहा है, विवाद भी उतना ही गहराता जा रहा है और सरकार पर सवालों की बौछार तेज होती जा रही है।

सुबह से ही संसद परिसर में अलग ही तरह की हलचल थी। विपक्षी दल लगातार सरकार पर निशाना साध रहे थे। उनका कहना है कि SIR को लेकर सरकार ने जल्दबाज़ी में फैसला लिया और अब वही फैसला उनके लिए भारी साबित हो रहा है। कई नेताओं ने कहा कि सरकार ने इसे अपनी उपलब्धि बताया था, लेकिन अब इससे जुड़ी समस्याएँ सामने आ रही हैं।
संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। जैसे ही सरकार की ओर से स्पष्टीकरण देने की कोशिश हुई, पूरा सदन शोर से भर गया और कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार SIR से जुड़ी अहम जानकारियाँ छिपा रही है। सरकार का कहना है कि सब कुछ पारदर्शी है, लेकिन विपक्ष मानने को तैयार नहीं है।
संसद के बाहर भी स्थिति बहुत गर्म थी। विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए लगातार नारेबाज़ी की और यह मांग की कि SIR पर विस्तृत और खुली चर्चा हो। उनका कहना है कि जब नीति जनता को प्रभावित कर रही है, तो उसका पूरा सच सामने लाया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने आग पकड़ ली है। लोग दो हिस्सों में बँट गए हैं—कुछ लोग सरकार के कदम को सही बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे गलत दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। बहस इतनी तेज़ हो चुकी है कि हर छोटी जानकारी मिनटों में वायरल हो रही है।
इस पूरे विवाद के बीच विशेषज्ञों का कहना है कि SIR से जुड़ी नीतियों को ठीक से लागू न करना और जनता तक स्पष्ट जानकारी न पहुँचाना ही सरकार के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। चुनावी मौसम नज़दीक होने से यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है। विपक्ष इसे एक बड़े राजनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है।
दूसरी तरफ़, सरकार कोशिश कर रही है कि इसे एक सकारात्मक कदम के रूप में पेश किया जाए। लेकिन संसद में लगातार हो रहे हंगामे और सवालों की बौछार से साफ़ है कि यह मुद्दा आसानी से शांत होने वाला नहीं है। सरकार को उम्मीद थी कि SIR से लाभ की चर्चा होगी, लेकिन फिलहाल यह चर्चा विवादों और विरोध के बीच फँस गई है।
दिन भर चली इस गतिविधि ने माहौल इतना तपा दिया कि सत्र के आगे के दिनों में भी तनाव बने रहने की पूरी संभावना है। विपक्ष ने साफ़ कहा है कि जब तक SIR की हर जानकारी सामने नहीं आएगी, वे पीछे नहीं हटेंगे।
अंत में, एक बात बिल्कुल स्पष्ट है—*SIR अब सिर्फ़ एक नीति नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है*। सरकार इसका दबाव झेल रही है और विपक्ष इसे एक मजबूत हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। आने वाले कुछ दिनों में यह मामला किस दिशा में जाएगा, पूरे देश की नज़र उसी पर टिकी रहेगी।