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सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह को यूपी के स्कूल बंदी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह को यूपी के स्कूल बंदी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा

लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार के 16 जून 2025 के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया। इस आदेश के तहत प्रदेश के 105 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने और अन्य स्कूलों में विलय करने का निर्णय लिया गया था।संजय सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह याचिका बच्चों के शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 से जुड़े वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने और मामले की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश में स्कूल बंद होने के कारण लाखों बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया गया है। गरीब परिवारों के बच्चों के पास प्राइवेट स्कूल भेजने के साधन नहीं हैं और उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को संसद और समाज में उठाया गया, लेकिन अब बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना अनिवार्य हो गया है।सांसद ने बताया कि सरकार ने दावा किया था कि स्कूल बंद नहीं किए जाएंगे या केवल विशेष परिस्थितियों में ही बंद होंगे, लेकिन कई स्कूल बंद हो गए हैं। रेलवे और हाईवे पार वाले स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं, जिससे बच्चों को लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।सुप्रीम कोर्ट में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि प्रभावित बच्चों में अधिकांश गरीब हैं और अब वे स्कूल नहीं जा सकते। बहस के बाद याचिका को सुप्रीम कोर्ट से वापस लेने की अनुमति दी गई, ताकि मामला सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट में उठाया जा सके। कोर्ट ने अनुमति दे दी और हाईकोर्ट में शीघ्र सुनवाई का निर्देश दिया।मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 16 जून 2025 को उत्तर प्रदेश सरकार ने कम या शून्य नामांकन वाले स्कूलों को आसपास के स्कूलों में विलय करने का आदेश जारी किया था। 24 जून को 105 प्राथमिक विद्यालयों की सूची जारी की गई, जिन्हें बंद या विलय किया जाना था।संजय सिंह ने कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 21ए और आरटीई अधिनियम, 2009 का उल्लंघन करता है, जो 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को पास के स्कूल में निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। याचिका में मांग की गई कि 16 जून और 24 जून के आदेश रद्द किए जाएं और बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जाए।उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों के बंद या विलय से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, विशेषकर गरीब, पिछड़ा, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चे प्रभावित हुए हैं। कई माता-पिता ने सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों से अपने बच्चों को स्कूल से हटा लिया, जिससे बच्चों का भविष्य खतरे में है।संजय सिंह ने कहा कि सरकारी निर्णय बिना सार्वजनिक परामर्श और स्कूल प्रबंधन समितियों की वैधानिक भूमिका का पालन किए बिना लिया गया, जो कानून और संविधान के खिलाफ है।सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में तेजी से सुनवाई के लिए प्रस्तुत होगा, ताकि बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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