
गांवों के समग्र विकास से ही विकसित भारत का सपना पूरा होगा: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य
ग्राम्य विकास विभाग की उपलब्धियों की समीक्षा, मनरेगा में महिला भागीदारी देश में सर्वश्रेष्ठ
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि देश के विकास का आधार गांवों का समग्र और संतुलित विकास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्र को सशक्त, स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। इसके लिए स्मार्ट सिटी की तरह स्मार्ट गांवों का निर्माण करना होगा ताकि विकास के परिणाम धरातल पर स्पष्ट दिखाई दें।शनिवार को योजना भवन में प्रदेश के समस्त मुख्य विकास अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का ग्राम्य विकास विभाग देश में कई योजनाओं में टॉप पर है और मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी देश में सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निष्क्रिय स्वंय सहायता समूहों को सक्रिय करने पर विशेष ध्यान दिया जाए और प्रधानमंत्री आवास योजना को और अधिक पारदर्शी तथा निष्पक्ष बनाया जाए।केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता गरीबों का कल्याण करना है। उन्होंने पीएमजीएसवाई की एफडीआर तकनीक की सफलता का उल्लेख करते हुए सड़कों की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया। साथ ही, समूहों के उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाकर उन्हें देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने तथा ग्रामीण युवाओं को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से जोड़ने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ग्राम विकास अधिकारी गांवों के विकास कार्यों की जमीनी हकीकत को समझें और मनरेगा से कराए गए पुराने कार्यों का अनुरक्षण सुनिश्चित करें। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एक समर्पित पोर्टल विकसित किया जाएगा। ग्राम चौपाल को जनता से जुड़ने का सशक्त माध्यम बनाकर ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत खेल मैदान बनाने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 खंड विकास अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। साथ ही, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में बेहतर कार्य के लिए वाराणसी, अम्बेडकर नगर और बिजनौर के मुख्य विकास अधिकारियों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान देकर पुरस्कृत किया गया।उन्होंने बटन दबाकर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के डैशबोर्ड का शुभारंभ किया और ग्राम्य विकास विभाग की त्रैमासिक पत्रिका के पांचवें संस्करण का विमोचन भी किया। उपमुख्यमंत्री ने विभाग की विभिन्न योजनाओं में देश में शीर्ष स्थान पर रहने पर संबंधित अधिकारियों को बधाई दी और सराहना की।केशव प्रसाद मौर्य ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए ग्रामीण क्षेत्र का समग्र व चहुंमुखी विकास आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों में गरीबी मुक्त वातावरण बनाया जाए और हर व्यक्ति को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। तकनीकी का भरपूर उपयोग कर ग्रामीणों को खेती के साथ उद्यमों से जोड़ने का काम किया जाए।सड़कों की कनेक्टिविटी, आंतरिक गलियों व नालियों की सफाई, जल निकासी के पर्याप्त प्रबंध, अमृत सरोवर के पास वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों को तेजी से लागू किया जाए। मनरेगा में 100 दिन कार्य करने वाले श्रमिकों को बीओसीडब्ल्यू बोर्ड में पंजीकृत कर उनकी सुविधाओं के बारे में जागरूक किया जाए।उन्होंने दिव्यांग लाभार्थियों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने, ग्राम चौपालों को और प्रभावी बनाने, महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देने और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग योजना में बड़े यूनिट लगाने की कार्ययोजना बनाने पर भी जोर दिया।बैठक में राज्यमंत्री ग्राम्य विकास विभाग विजय लक्ष्मी गौतम, अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य संस्करण विभाग बीएल मीणा, सचिव एवं आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग गौरी शंकर प्रियदर्शी, यूपीआरआरडीए मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखंड प्रताप सिंह, मिशन निदेशक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन दीपा रंजन समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।यह बैठक उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रामीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता और विकास कार्यों को गति देने के प्रयासों की मजबूत मिसाल है।
