diwali horizontal

राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी?

0 25

इंडिया Live: भारत की राजनीति में एक नया विवाद उस समय उभरकर सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ,

जिसमें खुद को करणी सेना का सदस्य बताने वाला एक व्यक्ति कांग्रेस नेता राहुल गांधी और लगभग 25 सांसदों को गोली मारने की धमकी देता दिखाई दिया।

वीडियो में कथित तौर पर कहा गया कि यदि संसद में स्पीकर के साथ हुए विवाद पर “माफी” नहीं मांगी गई तो वह “घर में घुसकर गोली मार देगा।” यह वीडियो तेजी से विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर फैल गया, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। हालांकि अभी तक पुलिस या केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि या खतरे के स्तर को लेकर स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

यह पूरा मामला संसद में हाल ही में हुए एक तीखे टकराव से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में विपक्षी सदस्यों और स्पीकर के बीच तीखी बहस हुई थी। इस दौरान कुछ केंद्रीय मंत्रियों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर के कक्ष में अनुचित व्यवहार किया। संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने दावा किया कि कुछ सांसदों ने स्पीकर के प्रति आक्रामक रुख अपनाया और प्रधानमंत्री का नाम लेकर टिप्पणी की। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। पार्टी महासचिव Priyanka Gandhi Vadra ने कहा कि उनकी पार्टी के किसी भी सांसद ने न तो अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और न ही किसी को धमकाया।

संसद के भीतर हुआ यह टकराव राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित था, लेकिन उसके कुछ दिनों बाद सामने आया धमकी भरा वीडियो मामले को एक अलग ही दिशा में ले गया। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया और कहा कि राजनीतिक मतभेदों को हिंसा की भाषा में बदलना चिंताजनक है। पार्टी ने यह भी मांग की कि वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की तुरंत पहचान कर कार्रवाई की जाए। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष से अभी तक इस धमकी की स्पष्ट निंदा या समर्थन में कोई आधिकारिक सामूहिक बयान नहीं आया है, हालांकि कुछ नेताओं ने इसे “व्यक्तिगत बयान” करार दिया है।
संसदीय परंपराओं की दृष्टि से देखा जाए तो Lok Sabha के स्पीकर का पद अत्यंत संवेदनशील और गैर-पक्षपाती माना जाता है। स्पीकर और विपक्ष के बीच विवाद नया नहीं है, लेकिन किसी भी राजनीतिक मतभेद के बाद खुलेआम हिंसा की धमकी दिया जाना असाधारण माना जाता है। सुरक्षा एजेंसियां आमतौर पर ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर जांच करती हैं, खासकर जब मामला राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से जुड़ा हो।

 

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में राजनीतिक ध्रुवीकरण भी एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के माध्यम से भड़काऊ भाषण और धमकी भरे वीडियो तेजी से फैलते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक बहसों का स्तर गिरने और ऑनलाइन कट्टरता बढ़ने से ऐसे वीडियो को समर्थन या प्रोत्साहन मिल सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वास्तव में किसी संगठन का आधिकारिक प्रतिनिधि है या नहीं।
संक्षेप में, अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि धमकी देने वाला वीडियो वास्तविक रूप से प्रसारित हुआ है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किसी ठोस हमले की साजिश की पुष्टि नहीं की गई है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और जांच की मांग उठ रही है। आने वाले दिनों में पुलिस या केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक बयान इस मामले की दिशा तय करेगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.