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मिशन शक्ति 5.0 के तहत प्रदेशभर में आयोजित ‘ष्शक्ति संवाद’ कार्यक्रम से बालिकाओं और महिलाओं को मिला सीधा संवाद का अवसर

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मिशन शक्ति 5.0 के तहत प्रदेशभर में आयोजित ‘ष्शक्ति संवाद’ कार्यक्रम से बालिकाओं और महिलाओं को मिला सीधा संवाद का अवसर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय बालिका सप्ताह (3 से 11 अक्टूबर) के अवसर पर प्रदेशभर में आज ‘ष्शक्ति संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस पहल का उद्देश्य लाभार्थी बालिकाओं और महिलाओं को योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभव साझा करने का मंच प्रदान करना था।जनपद स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड एवं सामान्य), पति की मृत्यु उपरांत महिला पेंशन योजना जैसी प्रमुख योजनाओं की लाभार्थी बालिकाओं और महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे और संवाद की श्रृंखला में लाभार्थियों ने अपनी समस्याएँ, अनुभव और योजनाओं से जुड़े सुझाव साझा किए।अधिकारियों ने लाभार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि आवश्यकतानुसार हर संभव सहायता समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जाएगी। इस पहल से बच्चों और महिलाओं की वास्तविक जरूरतें सीधे प्रशासन तक पहुँच सकीं, जिससे योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ मिल सके।अपर मुख्य सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग लीना जोहरी ने कहा कि ‘ष्शक्ति संवाद’ केवल योजनाओं की जानकारी या समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि यह उन बालिकाओं और महिलाओं की आवाज को सम्मान देने का प्रयास है, जो चुनौतियों के बावजूद आत्मनिर्भर बनने की राह पर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति के तहत हर लाभार्थी तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के साथ-साथ उनकी समस्याओं का समाधान भी सुनिश्चित किया जा रहा है।इस अवसर पर लाभार्थियों ने योजनाओं से मिले सहयोग और सशक्तिकरण के अनुभव साझा किए, जबकि प्रशासन ने इस संवाद को एक सीधा और सार्थक सेतु बनाने का प्रयास किया। प्रदेशभर में आज तक 2,000 से अधिक लाभार्थियों ने ‘ष्शक्ति संवाद’ में भाग लिया।उल्लेखनीय है कि मिशन शक्ति के पांचवें चरण (22 सितम्बर से 10 अक्टूबर, 2025) के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेशभर में कुल 14.66 लाख व्यक्तियों को जागरूक किया, जिसमें महिलाएँ, पुरुष, बालक और बालिकाएँ शामिल हैं। इस संवाद कार्यक्रम ने साबित किया कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर काम करें, तो हर बालिका और महिला के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

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