
यूपी विधानसभा में स्वास्थ्य सेवाओं पर घमासान, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का सपा पर तीखा हमला
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सदन में जोरदार बहस देखने को मिली। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल थी और अस्पतालों को “तबेला” बनाकर छोड़ दिया गया था।
“मुफ्त इलाज और दवाओं से बदली तस्वीर”
प्रश्नकाल के दौरान सपा विधायक समरपाल सिंह और मुबारकपुर से विधायक अखिलेश द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में जांच, इलाज और दवाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जा रहा है। साथ ही 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए ‘आयुष्मान वय वंदन योजना’ के माध्यम से विशेष स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
निजी अस्पतालों के मुद्दे पर सपा को घेरा
जब सपा विधायकों ने निजी अस्पतालों की मनमानी और भारी शुल्क वसूली का मुद्दा उठाया, तो ब्रजेश पाठक ने पलटवार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में निजी क्लीनिकों और जांच केंद्रों की दरों को नियंत्रित करने के लिए कोई नीति नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में सरकारी अस्पतालों की हालत इतनी खराब थी कि आम जनता को मजबूरी में निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ता था।
विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाब
सपा विधायक समरपाल सिंह ने आरोप लगाया कि सरकारी डॉक्टर अस्पतालों में ड्यूटी करने के बजाय अपने घरों पर मरीजों का इलाज कर अवैध वसूली कर रहे हैं। वहीं मुबारकपुर विधायक अखिलेश ने निजी अस्पतालों के लिए ‘यूनिफॉर्म रेट कार्ड’ लागू करने की मांग रखी।
इस पर डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार निजी अस्पतालों के परामर्श शुल्क या जांच दरों को एक समान करने के लिए कोई नई नीति लाने पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य फोकस सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को और अधिक मजबूत, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर है।