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उत्तर प्रदेश में ST विकास को बढ़ावा, योगी सरकार ने 72 करोड़ का प्रस्ताव भेजा

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योगी सरकार ने ST विकास के लिए भेजा 72 करोड़ का प्रस्ताव, शिक्षा, आवास और बुनियादी सुविधाओं पर रहेगा फोकस

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार अनुसूचित जनजाति के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए बड़े पैमाने पर योजनाएं तेजी से आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2025–26 के लिए करीब 72 करोड़ रुपये का विस्तृत विकास प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है, जिसका उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधायुक्त बनाना है।

छह जिलों में बड़े पैमाने पर आधारभूत विकास

जनजाति विभाग ने जिन प्रमुख विकास कार्यों का प्रस्ताव भेजा है, उनमें सड़कों, नालियों, सोलर लाइट, आवास और स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक सुधार शामिल है। प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं:

सोनभद्र
71 विकास कार्यों के लिए लगभग 44 करोड़ रुपये। इसमें इंटरलॉकिंग और सीसी रोड निर्माण शामिल है।

बहराइच (मिहीपुरवा क्षेत्र)
आठ ग्रामों में सीसी रोड और नाली निर्माण पर 15 करोड़ रुपये का प्रावधान।

ललितपुर
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के लिए फर्नीचर, उपकरण और 12 नए आवासों के निर्माण हेतु करीब 6 करोड़ रुपये।

लखीमपुर खीरी
दो ग्रामों में इंटरलॉकिंग रोड निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपये।

चंदौली
12 ग्रामों में सीसी रोड और सोलर लाइट लगाने के लिए 2 करोड़ 27 लाख रुपये।

बलरामपुर
थारू विकास परियोजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के फर्नीचर हेतु करीब 37 लाख रुपये।

शिक्षा और आवास पर फोकस

जनजाति विभाग के निदेशक शिव प्रसाद ने बताया कि शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आवास व्यवस्था सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में हैं।

पिछले पांच वर्षों में पूर्वदशम और दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाले 1.5 लाख से अधिक ST छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जा चुका है।

राज्य के 9 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में वर्तमान सत्र में 2026 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा वर्तमान में 2 छात्रावास संचालित हैं, जबकि आठ नए छात्रावास विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन हैं।

लखीमपुर खीरी, बहराइच और सोनभद्र में सहशिक्षा एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय पूरी क्षमता से संचालित हो रहे हैं, और ललितपुर में नया विद्यालय जल्द तैयार होगा।

वनाधिकार की कानूनी सुरक्षा

राज्य सरकार वनाधिकार अधिनियम 2006 को पूरी गंभीरता से लागू कर रही है।
यह अधिनियम प्रदेश के 13 जिलों में प्रभावी रूप से लागू है।

अब तक 23,430 दावों को स्वीकृत करते हुए अनुसूचित जनजाति और पारंपरिक वनवासियों को भू-अधिकार पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। इन सभी दावों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जा रहा है ताकि अधिकारों की कानूनी वैधता सुनिश्चित हो।

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