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अनुसूचित जाति के भूमिहीन पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की बकरी पालन योजना शुरू

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अनुसूचित जाति के भूमिहीन पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की बकरी पालन योजना शुरू

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति के भूमिहीन और गरीब पशुपालकों की आय वृद्धि, पोषण सुधार और आत्मनिर्भरता को लक्ष्य बनाकर बकरी पालन योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। इस योजना के अंतर्गत पूरे प्रदेश में 750 बकरी पालन इकाइयों की स्थापना की जाएगी, जिससे न केवल दुग्ध और मांस उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण रोजगार को भी नया आधार मिलेगा।पशुधन विभाग के अनुसार यह योजना सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। बकरी पालन को कम लागत और अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय मानते हुए सरकार ने इसे ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की योजना बनाई है। योजना का मुख्य उद्देश्य बकरी पालन के माध्यम से परिवारों को आर्थिक संबल देना है।प्रदेश के सभी 75 जनपदों में हर जिले में 10 बकरी इकाइयों की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक इकाई में एक नर और पांच मादा बकरियां दी जाएंगी, जिसकी कुल लागत 60 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इसमें से 54 हजार रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे जबकि लाभार्थी को केवल 6 हजार रुपये अंश के रूप में देने होंगे। बकरियों की खरीद, बीमा, परिवहन और चिकित्सा की व्यवस्था भी इसी धनराशि में की जाएगी।लाभार्थी चयन के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। 18 वर्ष से अधिक आयु के अनुसूचित जाति के बेरोजगार महिला-पुरुष जिनके पास बकरियों को रखने का उचित स्थान उपलब्ध हो, योजना के पात्र होंगे। बकरी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी। विधवा और निराश्रित महिलाओं को भी वरीयता दी जाएगी, साथ ही तीन प्रतिशत दिव्यांगजन को भी योजना में शामिल किया जाएगा।राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना से न केवल गरीब पशुपालकों को स्थायी आमदनी का जरिया मिलेगा, बल्कि प्रदेश की सकल आय और पोषण स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि योजना को पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ क्रियान्वित किया जाए ताकि लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे।

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