
क्या संघ प्रमुख ले डूबेगे मोदी और शाह को?
इण्डिया Live:हाल ही में संघ के कुछ प्रमुख नेताओं के बीच अंदरूनी लड़ाई की खबरें तेजी से सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ (RSS) के कुछ शीर्ष पदाधिकारियों की नाराजगी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक पहुंच गई है।
यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संघ और भाजपा का काफ़ी पुराना और मजबूत रिश्ता माना जाता है। संघ ने हमेशा मोदी और शाह का समर्थन किया है, लेकिन अब जो अंदरूनी झगड़े की खबरें आ रही हैं, वो साफ संकेत हैं कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है।

संघ के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि मोदी और शाह की केंद्र सरकार ने संघ की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा है। खासतौर पर कुछ फैसलों और नीतियों को लेकर वे असंतुष्ट हैं। उन्हें लगता है कि मोदी-शाह की टीम ने संघ की विचारधारा और रणनीतियों को नजरअंदाज कर दिया है, जिससे संघ का प्रभाव कम हो रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स में तो ये भी कहा जा रहा है कि संघ के अंदर “अलग आवाज़ें” उठ रही हैं, जो चाहते हैं कि मोदी-शाह को कड़ी चेतावनी दी जाए या उन्हें पदों से हटाया जाए। हालांकि, ये बातें अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है।
इस सबका असर भाजपा की कार्यशैली और चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। यदि संघ और मोदी-शाह के बीच इस खींचतान को सुलझाया नहीं गया, तो इससे भाजपा की एकता और पार्टी की साख को बड़ा झटका लग सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संघ ने हमेशा अपने सहयोगियों को अनुशासन में रखा है, लेकिन अब जो खबरें आ रही हैं, वे संकेत हैं कि संघ का धैर्य कम हो रहा है। अगले कुछ महीनों में यह साफ हो जाएगा कि मोदी और शाह इस दबाव को कैसे संभालते हैं।
बहरहाल, इस लड़ाई का असर न केवल केंद्र सरकार पर पड़ेगा, बल्कि आगामी राज्यों के चुनावों और देश की राजनीति पर भी इसका बड़ा प्रभाव हो सकता है।
इस बीच, भाजपा समर्थक इसे “अटकलें” और “राजनीतिक बयानबाजी” कहकर खारिज कर रहे हैं, जबकि विपक्ष इस खींचतान को मोदी सरकार की कमजोरी के रूप में पेश कर रहा है।
अभी के लिए, ये खबरें राजनीतिक दंगल का नया अध्याय हैं और आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की उम्मीद है।