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संडीला में ‘बयाद मजाज़ लखनवी’ मुशायरा आयोजित

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संडीला में ‘बयाद मजाज़ लखनवी’ मुशायरा आयोजित

लखनऊ: संडीला के छोटा चौराहा स्थित संडीला लॉन में ‘बयाद मजाज़ लखनवी’ काव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें उर्दू के महान शायर मजाज़ लखनवी को याद किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के सहयोग और सिदरा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के बैनर तले आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वासिफ फारूकी ने कहा कि मजाज़ एक मुस्कान का नाम थे, लेकिन उस मुस्कान के पीछे ग़मों का बड़ा भंडार छिपा था। उन्होंने जीवन भर संघर्ष, तंगी और नाकामियों का सामना किया। बावजूद इसके, उनका जिंदादिल अंदाज़ और मज़ाकिया शैली हर महफ़िल की रौनक हुआ करती थी।

मुख्य अतिथि साहिल सिद्दीकी (पूर्व प्रधान, अजगवां) ने कहा कि मजाज़ सदी की आवाज़ थे, जिनकी कविता में दर्द, संघर्ष, तड़प और उल्लास की प्रतिध्वनि साफ़ सुनाई देती थी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उर्दू साहित्य के प्रति रुचि और प्रेम को बढ़ाने वाला है।

कार्यक्रम के संयोजक और सिदरा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के महासचिव ज़ियाउल्लाह सिद्दीकी ने कहा कि मजाज़ ने उर्दू भाषा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। वे जन-जागरूकता, सामाजिक सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने ‘नज़र अलिगढ़ एंथम’ लिखकर उर्दू साहित्य में अमरता पाई।

कई गणमान्य अतिथियों—एडवोकेट अभिषेक दीक्षित, राम प्रकाश बेख़ुद और रज़ी अंसारी—ने भी मजाज़ को श्रद्धांजलि दी और उन्हें अपने समय का बेहतरीन शायर बताया।

काव्यपाठ में वासिफ फारूकी, राम प्रकाश, अब्दुल वली, आसिम काकौरवी, असगर बिलग्रामी, हुसैन संदिलवी, सैयद आसिम मकनपुरी, आबिद मंज़र हरदोई, गुफरान चुलबल, मकसूद अहमद पयामी, लीडर हिलोरी, प्रांजल अस्थाना, ज़ोहैब फ़ारूक़ी और इब्न सामी सहित कई शायरों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।

इस मौके पर फ़हीम अहमद (कॉर्पोरेट वार्ड 23) को उनकी निस्वार्थ सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में ज़ियाउल्लाह सिद्दीकी और हुमायूँ चौधरी ने मेहमानों को सम्मानपत्र, स्मृति चिह्न और शॉल भेंट किए।

रिसेप्शन कमेटी के प्रेसिडेंट और वरिष्ठ पत्रकार हुमायूँ चौधरी ने प्रमुख सचिव (भाषा) मनीष चौहान और उर्दू अकादमी के सेक्रेटरी शौकत अली का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सिदरा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी को यह आयोजन सौंपकर विभाग ने बड़ा भरोसा जताया, जिसे संडीला के साहित्यप्रेमियों ने सफल बनाया।

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