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कोयले वाले तंदूर पर लगाया गया प्रतिबंध

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कोयले वाले तंदूर पर लगाया गया प्रतिबंध

INDIA-
दिल्ली की हवा इन दिनों बहुत ज्यादा खराब हो गई है और इसका असर अब सरकार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अब तक हालात को लेकर शांत नजर आ रही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार एक्शन मोड में आ गई है। सरकार का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो लोगों की सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। इसी वजह से प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार नए फैसले लिए जा रहे हैं।दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति यानी डीपीसीसी ने राजधानी के सभी होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड स्टॉलों के लिए एक बड़ा आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अब कोयला और लकड़ी से चलने वाले तंदूरों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यानी अब तंदूरी रोटी, नान और कबाब बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक तंदूर दिल्ली में नहीं जल सकेंगे।
डीपीसीसी का कहना है कि कोयला और लकड़ी से चलने वाले तंदूरों से बहुत ज्यादा धुआं निकलता है, जो हवा को और जहरीला बनाता है। यह धुआं सीधे लोगों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह बहुत खतरनाक है। इसी को देखते हुए एयर एक्ट 1981 की धारा 31(A) के तहत यह सख्त आदेश जारी किया गया है।

आदेश में साफ कहा गया है कि सभी कमर्शियल किचन को अब गैस, बिजली या किसी अन्य स्वच्छ ईंधन पर शिफ्ट होना होगा। होटल और ढाबा मालिकों को तय समय के अंदर अपने तंदूर बदलने होंगे। अगर कोई नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस फैसले से होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों में चिंता जरूर बढ़ गई है। कई छोटे ढाबा और स्ट्रीट फूड बेचने वालों का कहना है कि तंदूर उनकी रोजी-रोटी का मुख्य साधन है और नया सिस्टम लगाना महंगा पड़ेगा। हालांकि सरकार का कहना है कि लोगों की सेहत सबसे ज्यादा जरूरी है और इसके लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है।
सरकार यह भी दावा कर रही है कि यह फैसला दिल्ली की हवा को साफ करने में मदद करेगा। आने वाले दिनों में प्रदूषण फैलाने वाले अन्य स्रोतों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। रेखा गुप्ता सरकार का साफ संदेश है कि अब दिल्ली की आबोहवा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे इसके लिए कितने ही कड़े फैसले क्यों न लेने पड़ें।

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