
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय और कश्मीर विश्वविद्यालय के बीच ऐतिहासिक MoU, छात्र–संकाय आदान-प्रदान और संयुक्त शोध को मिलेगा बढ़ावा
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय और कश्मीर विश्वविद्यालय के बीच ऐतिहासिक MoU, छात्र–संकाय आदान-प्रदान और संयुक्त शोध को मिलेगा बढ़ावा
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु और कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर के बीच छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान, संयुक्त शोध और अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह ऐतिहासिक करार विश्वविद्यालय परिषद की बैठक के दौरान श्रीनगर के लोकभवन में संपन्न हुआ।
शीर्ष नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर एवं कुलाधिपति मनोज सिन्हा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि मुख्यमंत्री एवं प्रो-चांसलर उमर अब्दुल्ला की विशेष उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।
समझौता ज्ञापन पर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह और कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलोफर खान ने हस्ताक्षर किए।
| भूमिका | नाम |
|---|---|
| अध्यक्ष | मनोज सिन्हा (एलजी, जम्मू-कश्मीर) |
| विशेष उपस्थिति | उमर अब्दुल्ला (मुख्यमंत्री) |
| हस्ताक्षरकर्ता | प्रो. कविता शाह, प्रो. नीलोफर खान |
समझौते की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रो. कविता शाह ने इसे केवल औपचारिक करार नहीं, बल्कि राष्ट्रव्यापी ज्ञान–संवाद का सशक्त सेतु बताया। उन्होंने कहा कि यह MoU भारत–नेपाल सीमा क्षेत्र में स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय और उत्तरी छोर पर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय के बीच शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक संवाद की एक अखंड धारा स्थापित करेगा।
यह सहयोग तराई क्षेत्र से लेकर हिमालयी भूभाग तक बौद्धिक विरासत और आधुनिक अकादमिक दृष्टिकोण को जोड़ने का कार्य करेगा।
संयुक्त शोध और भविष्य की संभावनाएं
दोनों विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर संयुक्त शोध को प्राथमिकता देंगे। यह साझेदारी पर्यावरणीय सततता और क्लाइमेट चेंज पर केंद्रित अनुसंधान को नई दिशा देने में सहायक होगी।
| शोध के प्रमुख क्षेत्र | संभावित लाभ |
|---|---|
| पर्यावरण संरक्षण | नीति-आधारित समाधान |
| जैव-विविधता | क्षेत्रीय अध्ययन |
| जलवायु परिवर्तन | संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट |
विद्यार्थियों और शिक्षकों को व्यापक लाभ
इस MoU से दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को संयुक्त शोध परियोजनाएं, छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान, अतिथि व्याख्यान और साझा प्रकाशन जैसे अवसर मिलेंगे। इससे विद्यार्थियों को बहु-सांस्कृतिक और बहु-क्षेत्रीय शैक्षणिक अनुभव प्राप्त होगा, जो ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करेगा।
यह जानकारी सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने दी।