
INDO-PAK TENSIONS:अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में एक नया विवादास्पद दावा किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को उन्होंने परमाणु युद्ध में बदलने से रोका। ट्रंप के अनुसार उस समय हालात बेहद गंभीर थे और कई लड़ाकू विमान गिर चुके थे, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाया जाता, तो इस तनाव का परिणाम एक बड़े सैन्य और मानविक संकट के रूप में सामने आता।

ट्रम्प ने अपने बयान में बताया कि उन्होंने व्यापार शुल्क (टैरिफ) लगाने की धमकी देकर दोनों देशों पर दबाव डाला। उनके मुताबिक इस कदम ने भारत और पाकिस्तान को सीधे सैन्य टकराव से रोकने में मदद की और क्षेत्र में बड़ी तबाही को टाल दिया। उन्होंने इसे एक “रणनीतिक और निर्णायक” कदम बताया, जिसे उन्होंने अपनी वैश्विक कूटनीति का हिस्सा माना।

हालांकि, भारत की तरफ से हमेशा यह स्पष्ट किया गया है कि मई 2025 के दौरान सैन्य तनाव को रोकने में किसी बाहरी देश की भूमिका नहीं थी। नई दिल्ली ने बार-बार कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा संबंधी निर्णय और तनाव का प्रबंधन दोनों देशों की अपनी जिम्मेदारी थी। ट्रंप के बयान के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों में इस दावे पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिसमें कुछ ने इसे राजनीतिक प्रचार और अतिशयोक्ति बताया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के इस तरह के दावे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बहस को बढ़ा सकते हैं। दक्षिण एशिया में पहले से ही तनावपूर्ण परिस्थितियों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच यह बयान नई बहस का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के दावे को सत्यापित करना कठिन है, लेकिन इससे वैश्विक मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भारत-पाकिस्तान संबंधों की चर्चा और बढ़ जाएगी।

ट्रम्प ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि उनकी नीति हमेशा “सख्त और अप्रत्याशित” रही है, जिसमें व्यापार, सैन्य और कूटनीतिक दबावों का इस्तेमाल वैश्विक मुद्दों को नियंत्रित करने के लिए किया गया। उन्होंने इसे अपनी प्रशासनिक शैली का हिस्सा बताया और कहा कि ऐसी कार्रवाइयाँ उनके कार्यकाल के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी थीं।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मीडिया में ट्रंप के इस दावे को लेकर विविध प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे उनके चुनावी प्रचार और वैश्विक छवि मजबूत करने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा जोखिमों पर एक गंभीर चेतावनी के रूप में भी देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप का यह बयान न केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों में, बल्कि अमेरिका की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी बहस का नया आयाम जोड़ता है। आने वाले दिनों में इस दावे की सटीकता और इसके असर पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मीडिया की नजरें टिकी रहेंगी