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ईरान के हमलो से अमेरिकी ठिकानों पर मचा कोहराम

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ईरान के हमलो से अमेरिकी ठिकानों पर मचा कोहराम

 

मध्य पूर्व एक बार फिर गंभीर सैन्य टकराव के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। United States ने Iran और Israel के बीच तेज़ी से बढ़ते संघर्ष के बीच क्षेत्र में स्थित अपने सभी प्रमुख सैन्य अड्डों को हाई अलर्ट पर रख दिया है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका–इज़राइल के संयुक्त हवाई अभियान के तहत ईरानी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद हालात तेजी से बिगड़े। इसके जवाब में तेहरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की श्रृंखला शुरू कर दी। इन हमलों की जद में बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और जॉर्डन

जैसे देश आए, जहां अमेरिकी सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक,

ईरानी बलों ने जवाबी कार्रवाई में “फतह” हाइपरसोनिक मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है, जो अत्यधिक गति और उच्च गतिशीलता के कारण पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देने में सक्षम मानी जाती हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह इन उन्नत हथियारों की पहली वास्तविक युद्धक्षेत्र में तैनाती मानी जाएगी। हाइपरसोनिक तकनीक के इस्तेमाल ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रणनीतिक चिंताओं को और गहरा कर दिया है, क्योंकि इस तरह के हथियार चेतावनी और अवरोधन के समय को बेहद कम कर देते हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा घटनाक्रम क्षेत्रीय संघर्ष को व्यापक युद्ध में बदल सकता है, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति मार्ग, विशेषकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य, गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी और सहयोगी सेनाएं वायु रक्षा प्रणालियों को सक्रिय रखते हुए संभावित नए हमलों के लिए तैयार हैं, जबकि ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

 

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