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स्मार्ट मीटर या स्मार्ट धोखा?

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उत्तर प्रदेश : की राजधानी Lucknow से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने आम जनता की चिंता को और बढ़ा दिया है। स्मार्ट मीटर को लेकर पहले से चल रही शिकायतों के बीच अब एक मामला ऐसा सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। एक महिला बिजली का बिल देखकर फूट-फूटकर रो पड़ी, क्योंकि बिल इतना ज्यादा था कि उसे समझ ही नहीं आया कि आखिर यह कैसे संभव है।

यह मामला जुड़ा है बिजली विभाग के हेल्पलाइन सेंटर 1912 से, जहां बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल अचानक कई गुना बढ़ गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ उपभोक्ताओं ने दावा किया कि उनका कनेक्शन कटने के बावजूद भी मीटर में यूनिट लगातार बढ़ रही है।

पीड़ित महिला ने बताया कि उसका बिजली कनेक्शन कुछ समय पहले काट दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद बिल में यूनिट बढ़ती रही और अब उसे भारी-भरकम रकम का बिल थमा दिया गया है। यह देखकर वह इतना घबरा गई कि मौके पर ही रोने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे संभाला और उसकी शिकायत दर्ज कराई।

इस घटना के बाद 1912 मुख्यालय में लोगों की भीड़ जुट गई। हर कोई अपनी-अपनी शिकायत लेकर पहुंचा था। किसी का कहना था कि मीटर जरूरत से ज्यादा रीडिंग दिखा रहा है, तो किसी ने आरोप लगाया कि बिना बिजली इस्तेमाल किए भी बिल बढ़ रहा है। इन शिकायतों ने स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम पर आधारित होते हैं, जिनमें गड़बड़ी की संभावना बेहद कम होती है। लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतें इस दावे को चुनौती देती नजर आ रही हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि हर शिकायत की जांच की जा रही है और अगर कहीं कोई तकनीकी समस्या पाई जाती है, तो उसे तुरंत ठीक किया जाएगा।

सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर कनेक्शन कटने के बाद भी यूनिट बढ़ रही है, तो इसका कारण क्या हो सकता है? क्या यह तकनीकी खराबी है, या फिर डेटा सिंकिंग में कोई दिक्कत? या कहीं मीटर की इंस्टॉलेशन में ही कोई गलती हुई है? इन सवालों के जवाब फिलहाल साफ नहीं हैं, लेकिन लोगों का भरोसा जरूर डगमगाता नजर आ रहा है।

इस पूरे मामले ने स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे सरकार डिजिटल और पारदर्शी बिजली व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम बता रही है। लेकिन अगर उपभोक्ताओं को ही इस सिस्टम पर भरोसा नहीं रहेगा, तो इसका उद्देश्य अधूरा रह

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