
दिल्ली : में संसद के भीतर एक बार फिर आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। Dimple Yadav ने Constitution (131st Amendment) Bill के Lok Sabha में पास न होने पर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
डिंपल यादव ने कहा, “यह पूरी तरह से एंटी-दलित और एंटी-OBC है। जब समाजवादी पार्टी ने OBC महिलाओं को आरक्षण देने की मांग की, क्योंकि यह आधी आबादी का सवाल है, तब सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर समाज के भीतर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने आगे कहा, “ये वही लोग हैं जो आधी आबादी के भीतर भी दरार डालते हैं। समाज में अविश्वास और डर का माहौल बनाते हैं, और इसी हथियार के जरिए सत्ता में बने रहते हैं।” डिंपल यादव के इस बयान ने संसद के बाहर भी राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
Samajwadi Party की ओर से यह स्पष्ट संकेत है कि वह OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगी। वहीं, सत्ता पक्ष इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए अपने फैसलों को संतुलित और समावेशी बता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि इसमें दलित, पिछड़ा वर्ग और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय शामिल हैं।
फिलहाल, Parliament of India के अंदर और बाहर, यह बहस सिर्फ एक बिल तक
सीमित नहीं रह गई है—यह देश की सामाजिक संरचना, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक रणनीतियों को लेकर एक बड़ी लड़ाई का रूप लेती जा रही है।