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Elon Musk के Rocket ने चांद पर मचाई तबाही!

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Elon Musk के Rocket ने चांद पर मचाई तबाही!

INDIA LIVE; अंतरिक्ष की दुनिया से एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एलन मस्क की कंपनी SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का एक खाली हिस्सा आखिरकार चंद्रमा से टकरा गया। यह कोई नया लॉन्च नहीं था, बल्कि रॉकेट का सेकेंड स्टेज था, जो अपना काम पूरा करने के बाद लंबे समय तक अंतरिक्ष में बिना किसी नियंत्रण के भटकता रहा। करीब एक साल तक अंतरिक्ष में घूमने के बाद यह चंद्रमा की सतह से लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि चांद की सतह पर एक नया गड्ढा बन गया और बड़ी मात्रा में धूल और चट्टानों का गुबार अंतरिक्ष में फैल गया। इस घटना को दुनिया की कई बड़ी वेधशालाओं और वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड किया। पहली नजर में यह एक स्पेस हादसा लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिक इसे एक अनमोल मौका मान रहे हैं।

अब सवाल यह है कि आखिर यह रॉकेट चंद्रमा तक पहुंचा कैसे? जब Falcon 9 रॉकेट किसी उपग्रह या अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में छोड़ता है, तो उसका ऊपरी हिस्सा यानी सेकेंड स्टेज अपना काम पूरा करने के बाद अलग हो जाता है। कई बार इसे सुरक्षित तरीके से पृथ्वी के वातावरण में वापस लाया जाता है, लेकिन कुछ मिशनों में यह अंतरिक्ष में ही रह जाता है। धीरे-धीरे सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्तियां इसकी दिशा बदलती रहती हैं। इसी कारण यह रॉकेट का हिस्सा लंबे समय तक अंतरिक्ष में घूमता रहा और आखिरकार चंद्रमा की ओर बढ़ गया। वैज्ञानिक इसकी गति और दिशा पर लगातार नजर रख रहे थे और उन्हें पहले से अंदाजा था कि यह चंद्रमा से टकरा सकता है।

इस टक्कर के बाद चंद्रमा की सतह पर एक नया क्रेटर यानी गड्ढा बना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस टक्कर से चंद्रमा की ऊपरी सतह के नीचे छिपी हुई परतें बाहर आई होंगी। चंद्रमा की सतह करोड़ों सालों से धूल और पत्थरों की एक मोटी परत से ढकी हुई है। जब इतनी तेज रफ्तार से कोई भारी वस्तु टकराती है, तो नीचे मौजूद पुरानी चट्टानें और खनिज ऊपर आ जाते हैं। इससे वैज्ञानिक यह समझ सकते हैं कि चंद्रमा के अंदर किस तरह की मिट्टी और चट्टानें मौजूद हैं। यह जानकारी भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की बस्ती बसाने और वहां संसाधन खोजने में बहुत काम आ सकती है।

वैज्ञानिकों के लिए यह घटना इसलिए भी खास है क्योंकि यह एक ऐसा प्रयोग है, जिसे उन्होंने खुद नहीं किया, लेकिन जिससे उन्हें महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। अब अलग-अलग देशों के ऑर्बिटर इस नए क्रेटर की तस्वीरें लेंगे और पहले की तस्वीरों से तुलना करेंगे। इससे यह पता लगाया जाएगा कि टक्कर के बाद कितना बड़ा गड्ढा बना, कितनी धूल उड़ी और सतह में क्या बदलाव आया। इस तरह के अध्ययन से यह समझने में मदद मिलेगी कि भविष्य में अगर किसी अंतरिक्ष यान की लैंडिंग करनी हो या चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाना हो, तो वहां की जमीन कितनी मजबूत या कमजोर है।

आने वाले वर्षों में अमेरिका, भारत, चीन और कई अन्य देश चंद्रमा पर बड़े मिशन भेजने की तैयारी कर रहे हैं। नासा का Artemis Mission इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने की योजना पर काम कर रहा है। वहीं भारत भी अपने भविष्य के चंद्र अभियानों की तैयारी कर रहा है। ऐसे में चंद्रमा की सतह, उसकी मिट्टी और वहां बनने वाले गड्ढों के बारे में हर नई जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक यह भी समझना चाहते हैं कि अगर भविष्य में कोई उल्कापिंड या अंतरिक्ष का मलबा चंद्रमा से टकराता है, तो उसका असर कितना होगा। इस घटना से मिले आंकड़े ऐसे सभी सवालों के जवाब देने में मदद करेंगे।

हालांकि इस घटना ने एक और गंभीर सवाल खड़ा किया है। अंतरिक्ष में लगातार बढ़ता हुआ स्पेस डेब्रिस यानी अंतरिक्ष का कचरा भविष्य के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। हजारों पुराने रॉकेट, टूटे हुए उपग्रह और अन्य मलबा पृथ्वी के आसपास और गहरे अंतरिक्ष में मौजूद हैं। यदि इन्हें समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे हादसे और भी बढ़ सकते हैं। इसलिए वैज्ञानिक अब ऐसे सिस्टम विकसित करने पर भी काम कर रहे हैं, जिनसे पुराने रॉकेट और अंतरिक्ष मलबे को सुरक्षित तरीके से हटाया जा सके।

कुल मिलाकर, SpaceX के Falcon 9 के इस खाली हिस्से की चंद्रमा से हुई टक्कर सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि विज्ञान के लिए एक नया अवसर भी है। इस घटना से वैज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह, उसकी संरचना और भविष्य के मिशनों के लिए जरूरी जानकारी मिलेगी। यही वजह है कि जिस घटना को आम लोग एक हादसा मान रहे हैं, उसी को वैज्ञानिक एक Golden Scientific Opportunity कह रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि इस टक्कर से मिले आंकड़े आने वाले Moon Mission, Lunar Base और अंतरिक्ष अनुसंधान को किस तरह नई दिशा देते हैं।

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