SUPER AL NINO: 180 से अधिक भारतीय वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने साल 2026-27 में भारत पर मंडरा रहे एक बेहद शक्तिशाली सुपर अल नीनो’ (Super El Niño) के गंभीर खतरे को लेकर एक संयुक्त चेतावनी जारी की है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और अमेरिकी एजेंसी NOAA के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, प्रशांत महासागर में पानी का तापमान असाधारण रूप से बढ़ रहा है और इस बात की 90% से अधिक संभावना है कि यह स्थिति एक ऐतिहासिक और विनाशकारी रूप ले सकती है। यह प्रभाव नवंबर 2026 से फरवरी 2027 तक चरम पर रहने की उम्मीद है।

वैज्ञानिकों की मुख्य चिंताएं और सूखे की चेतावनी के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
 सूखे और भीषण गर्मी का संकट
  • कम बारिश और सूखा: अल नीनो के कारण देश में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ेंगी, जिससे बारिश में भारी कमी आ सकती है और देश के कई हिस्सों को गंभीर सूखे का सामना करना पड़ सकता है।
    रिकॉर्ड तोड़ गर्मी: वैज्ञानिकों के अनुसार, साल 2027 में तापमान के पुराने सारे रिकॉर्ड टूट सकते हैं। अत्यधिक गर्मी और लू (Heatwaves) का सीधा असर आम जनजीवन और कृषि पर पड़ेगा।

     

    आजीविका पर दबाव: पानी की किल्लत और सूखे की स्थिति के कारण हमारे किसानों, चरवाहों और मछुआरों पर सबसे ज्यादा आर्थिक और सामाजिक दबाव बढ़ेगा। खरीफ और रबी दोनों फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

     

    पर्यावरण और वन्यजीवों को नुकसान
  • जंगलों में आग (Wildfires): अत्यधिक सूखे और गर्मी के कारण भारत के जंगलों, विशेषकर पश्चिमी घाट के वर्षावनों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ सकती हैं। बड़े पेड़ों के सूखने और मरने की भी आशंका है।
    पारिस्थितिकी (Ecosystem) में बदलाव: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इसके कारण जानवरों के व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव और पौधों में फलों के उत्पादन में देरी जैसे सूक्ष्म लेकिन गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

     

    समुद्री जीवन पर खतरा: समुद्र का तापमान बढ़ने (Marine Heatwaves) के कारण बड़े पैमाने पर प्रवाल भित्तियों (Coral Bleaching) के नष्ट होने और मछलियों के अपना स्थान बदलने का खतरा है, जिससे तटीय इलाकों के मछुआरे प्रभावित होंगे।

     

    वैज्ञानिकों की सरकार से अपील और सुझाव

          वैज्ञानिकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 16 सितंबर 2026 को एक विशेष रिसर्च पेपर जारी कर तुरंत कदम उठाने की मांग की है:

        त्वरित निगरानी और डेटा रिकॉर्डिंग: सरकार और स्थानीय प्रशासन को तुरंत मौसम केंद्र और पुराने सैटेलाइट डेटा का उपयोग कर पर्यावरणीय बदलावों की                  निगरानी शुरू कर देनी चाहिए।

  • सरकारी प्रक्रियाओं में तेजी: फंडिंग एजेंसियों और राज्य वन विभागों से अपील की गई है कि वे शोधकर्ताओं को अनुमति और आर्थिक सहायता देने की प्रक्रियाओं को तेज करें ताकि इस संकट के प्रभाव को समय रहते रिकॉर्ड और कम किया जा सके।
    जलवायु वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल (Roxy Mathew Koll) के अनुसार, हालांकि हम इस सुपर अल नीनो को रोक नहीं सकते, लेकिन समय रहते उठाए गए सुरक्षात्मक कदम और कमजोर हो रहे इकोसिस्टम को बचाना हमें भविष्य के इस बड़े खतरे के लिए तैयार कर सकता है।