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अखिलेश यादव ने घोषित किया गोरखपुर-फैजाबाद का MLC प्रत्याशी 

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अखिलेश यादव ने घोषित किया गोरखपुर-फैजाबाद का MLC प्रत्याशी 

UTTAR PRADESH LIVE:उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। इसी बीच विधान परिषद यानी एमएलसी चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपना रुख साफ कर दिया है।

समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कमलेश यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची का ऐलान करते हुए इस नाम की भी घोषणा की।

अब सवाल है कि आखिर गोरखपुर-फैजाबाद सीट सपा के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

दरअसल, उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें छह सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की हैं, जबकि पांच सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की हैं।

इन चुनावों को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ सकता है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टियां शिक्षक, कर्मचारी और स्नातक वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट की बात करें तो समाजवादी पार्टी ने यहां कमलेश यादव पर भरोसा जताया है।

पार्टी पहले ही इस सीट के लिए उनका नाम घोषित कर चुकी थी और अब अखिलेश यादव ने पार्टी की बैठक के बाद उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा करते हुए इस पर मुहर लगा दी है।

सपा ने सिर्फ गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर ही उम्मीदवार नहीं उतारा है।

पार्टी ने अलग-अलग शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए कुल 11 उम्मीदवार घोषित किए हैं। शिक्षक सीटों में मिर्जापुर-वाराणसी से लाल बिहारी यादव, लखनऊ से सुशील कुमार, आगरा से प्रकाश चंद्र गुप्ता, गोरखपुर-फैजाबाद से कमलेश यादव, मुरादाबाद-बरेली से दानिश अख्तर और मेरठ से नितिन तोमर को उम्मीदवार बनाया गया है।

वहीं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए भी पार्टी ने अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं।

इस पूरी सूची से साफ है कि समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद चुनाव की तैयारी पहले से शुरू कर रखी है।

लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल है कि गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर कमलेश यादव के सामने चुनौती क्या होगी?

इस सीट पर मुकाबला सिर्फ दो राजनीतिक दलों के बीच नहीं माना जा रहा। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवारों की अपनी व्यक्तिगत पकड़, शिक्षक संगठनों से संबंध और मतदाताओं के बीच सक्रियता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यानी यहां सिर्फ पार्टी का नाम ही काफी नहीं होगा। उम्मीदवार को अपने मतदाताओं के बीच मजबूत संपर्क भी बनाना होगा।

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने भी इन चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से भाजपा ने ध्रुव त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है।

ऐसे में गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर सपा और भाजपा के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।

अब मुकाबला किस दिशा में जाता है, यह शिक्षक मतदाताओं के रुख और दोनों उम्मीदवारों की चुनावी तैयारी पर निर्भर करेगा।

इस चुनाव का एक और पहलू है—2027 का विधानसभा चुनाव।

राजनीतिक दल इन एमएलसी चुनावों को अपने संगठन और जनाधार की तैयारी के तौर पर भी देख रहे हैं। शिक्षक और स्नातक वर्ग के बीच मजबूत संपर्क आने वाले समय में पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

समाजवादी पार्टी की तरफ से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि पार्टी शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देगी। अखिलेश यादव ने एमएलसी उम्मीदवारों की घोषणा के दौरान पुरानी पेंशन को लेकर भी अपना रुख सामने रखा।

अब गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर सभी की नजरें रहेंगी।

क्योंकि एक तरफ समाजवादी पार्टी ने कमलेश यादव को मैदान में उतारा है, तो दूसरी तरफ भाजपा ने ध्रुव त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है।

ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की चुनावी रणनीति, शिक्षक संगठनों का रुख और मतदाताओं के बीच उम्मीदवारों की सक्रियता महत्वपूर्ण रहने वाली है।

फिलहाल समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते साफ कर दिए हैं।

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कमलेश यादव सपा के उम्मीदवार हैं और अब चुनावी मैदान में मुकाबला और दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है।

अब देखना होगा कि शिक्षक मतदाता किस उम्मीदवार के पक्ष में अपना समर्थन देते हैं और विधान परिषद की इस सीट पर आखिर किसकी जीत होती है।

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