
बाराबंकी : जनपद के किसान नेता धर्मेंद्र यादव उर्फ बबलू ने बाराबंकी के दर्जनों मुद्दों को उठाते हुए ज्ञापन पत्र देते हुए कार्यवाही की मांग की है उन्होंने कहा कि बाराबंकी में तैनात रहे रत्नेश सिंह थाना जैदपुर में कई बड़े बड़े मामलों में हंसे जिसके बाद उनकी जांच भी हुई जिन्हें उन्हें बेड एंट्री कर दिया गया लेकिन उसके बावजूद भी उन्हें चार्ज दे दिया गया जिसको लेकर किसान नेता धर्मेंद्र यादव और बबलू ने ज्ञापन देते हुए धरने प्रदर्शन की मांग की है उन्होंने कहा कि अगर कार्यवाही नहीं हुई तो धरना प्रदर्शन करने के साथ-साथ सड़क भी जाम किया जाएगा, किसान नेता ने ज्ञापन में बताया है कि लखनऊ के गोमती नगर में तैनात अतिरिक्त कोतवाल रत्नेश सिंह की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके उच्च अधिकारियों को ज्ञापन देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं
उनका आरोप है कि बाराबंकी में जब रत्नेश सिंह तैनात थे तब उनकी कार्यशैली पर सवाल उठते चले आए हैं उसके बाद भी उन्हें लखनऊ का चार्ज दे दिए गए और वह आए दिन किसानों को परेशान किया करते हैं जब बाराबंकी में तैनात थे रत्नेश सिंह तब भी इनके ऊपर तमाम तरह की कार्यवाही भी हो चुकी हैं लेकिन उसके बावजूद भी लखनऊ पुलिस मेहरबान है और रत्नेश सिंह को अतिरिक्त कोतवाल के पद पर बैठा दिया है,
आरोप है कि रत्नेश सिंह करीब 2018 बाराबंकी में बाराबंकी में भी तैनात थे जिनकी कार्यशैली आए दिन अखबारों की सुर्खियां और टीवी की ब्रेकिंग न्यूज बना करती थी, रत्नेश आजमगढ़ में भी जब तैनात थे तो इनके अजीबोगरीब मामले सामने आया करते थे जो सवाल खड़े करने वाले थे, फिलहाल बाराबंकी में इन्होंने एक ऐसा कार्य किया जो रातों-रात सुर्खियों में आने के बाद लाइन हाजिर हो गए,हिस्ट्रीशीटर व मारफीन तस्कर कासिम उर्फ शहीम का पासपोर्ट जारी होने के बहुचर्चित मामले की जांच प्रभावित करने का प्रयास कर रहे प्रभारी निरीक्षक जैदपुर रत्नेश ¨सह को पुलिस अधीक्षक ने लाइनहाजिर कर दिया था। गौरतलब है कि जैदपुर थाना क्षेत्र के ग्राम टिकरा उस्मा निवासी मादक पदार्थ तस्कर कासिम उर्फ शहीम पुत्र तसव्वर के खिलाफ थाने में करीब 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे और वह हिस्ट्रीशीटर भी था। इसके बावजूद पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर उसका पासपोर्ट जारी कर दिया गया था।
कासिम ने 27 दिसंबर 2017 को पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। 18 जनवरी 2018 को थाने से कासिम के पक्ष में पुलिस ने रिपोर्ट लगा दी और उसका पासपोर्ट जारी हो गया। मामला जब संज्ञान में आया तो आनन-फानन में 29 जनवरी को कासिम का पासपोर्ट निरस्त कराया गया था। इस मामले में एएसपी शशिकांत तिवारी की रिपोर्ट के बाद चार सिपाहियों की बर्खास्तगी और बैड इंट्री की कार्रवाई एसएचओ के खिलाफ तत्कालीन एसपी ने शुरू कराई थी। जिसकी जांच उस समय एएसपी दिगंबर कुशवाहा कर रहे थे एसएचओ ने तस्कर को दे दी क्लीनचिट की संस्तुति रू इसी बीच जब यह प्रकरण प्रकाश में आया तो 27 जनवरी को एसएचओ रत्नेश ¨सह ने कासिम सहित तीन लोगों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था। डीआइजी फैजाबाद से कासिम के रिश्तेदार ने शिकायत की थी कासिम पर फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया है। क्योंकि उसकी लोकेशन उस समय एयरपोर्ट लखनऊ में थी।
जांच में सही पाए जाने पर एसएचओ ने ही कासिम का नाम मुकदमे से हटाने की रिपोर्ट तैयार कर दी। जिस पर एएसपी ने नाराजगी जताई थी। वहीं एसपी को सूचना मिली एसएचओ वहां तैनाती के दौरान जांच प्रभावित करने का प्रयास कर रहे है और साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर रहे हैं। जिस पर एसपी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया था। उस समय के एसपी वीपी श्रीवास्तव ने बताया था कि थाने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की सूचना थी और अन्य कारण भी थे। प्रशासनिक आधार पर रत्नेश को लाइन हाजिर किया गया था लेकिन उसके बावजूद भी रत्नेश सिंह को चार्ज दिया गया ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि आने वाले समय में क्या कार्यवाही की जाती है।