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जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाए रे…

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नव वर्ष पर हुआ कवि सम्मेलन, झूमे श्रोता

त्रिलोकपुर, बाराबंकी :  नव वर्ष के मौके पर जैन मंदिर परिसर में अखिल भारतीय आध्यात्मिक कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ इससे पूर्व सन्त श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ससंघ के सानिध्य में 1008 दीपो को जला कर सामूहिक आरती करके समाज और देश मे अमन चैन कायम रहने की प्रार्थना की। और इन पंक्तियों को पढ़ा नव वर्ष मुबारक हो नव हर्ष मुबारक हो वो गुलशन के माली झोली न रहे खाली कार्यक्रम में पहुचे सांसद उपेंद्र रावत सदर विधायक सुरेश यादव ने जैन धर्म गुरु के आगे शीष नमन करके आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर जैन समाज ने उन्हें अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। अपने संबोधन में विधायक ने कहा कि साल की अंतिम रात न जाने कैसे कैसे जश्न में लोग डूबे रहते है ऐसे में जैन समाज के इस प्रेरणादायक कार्यक्रम में पहुच कर सुखद अनुभूति महसूस कर रहा हु। कहा जिस जगह संत बैठे होते उस जगह पहुच कर उनके त्याग तपस्या जे असर से सहम जाता हूं। बताया कि की संतो के आहवाहन पर वह मांसाहार 10 साल पहले छोड़ दिया था। इस मौके पर प्रबंधक सुनील जैन कमलेश जैन महावीर जैन अंकुर जैन प्रतीक जैन राजीव जैन मौजूद रहे। कवि सम्मेलन का आगाज सन्त श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ने अपनी इन पंक्तियों से किया तो श्रोता झूम झूम कर थिरकने लगे।

जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाए रे होनी अनहोनी कब क्या घट जाए रे। लखनऊ से पधारे अखिल तिवारी पढ़ा जहर हवाओ में मीठा कब तक आखिर घोलेगे। हम बंदे मातरम बंदे मातरम बोलेंगे मध्य प्रदेश के छतरपुर से पधारी नम्रता जैन ने कुछ यू कहा विकृतियों और विसंगतियों मन कहता अंगार लिखूं। रोज हरण की जाती सीता फिर कैसे श्रृंगार लिखूं नैनीताल से आये कवि मोहन मुन्तजिर ने कहा माँ से बढ़कर इस दुनिया मे केवल मां ही होती है प्रख्यात मिश्रा की इन पंक्तियों को खूब सराहा गया। बोटी बोटी कट जॉऊ इंच इंच बात जॉऊ लाडला न पुरखो की नांक कटाएगा। भोपाल से आये अंशुल जैन ने अपनी बात इस तरह कही। सदा सम्मान होता है सदा गुड़गान होता है, वो जिसको आत्मा का ज्ञान होता है।

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