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एक गोली गिरधारी के सीने में तो एक बाईं जांघ में लगी

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लखनऊ : अजीत हत्याकांड का मुख्य आरोपी व शूटर गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर रविवार देर रात पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस उसे लेकर असलहा बरामद करने खरगापुर निकली थी, जहां मौका पाकर उसने दरोगा पर सिर से वार किया और सरकारी पिस्तौल छीनकर भागने लगा। अन्य पुलिसकर्मियों ने पीछा किया तो फायरिंग कर दी। एसएसआई के दाहिने हाथ में गोली लगी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में गिरधारी गंभीर रूप से घायल हो गया। लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस गिरधारी को तीन दिन की कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही थी। पुलिस ने मुठभेड़ वाले इलाके को सील कर दिया है। देर शाम पोस्टमार्टम में गिरधारी को दो गाली लगने की पुष्टि हुई। एक गोली बाएं तरफ सीने में और दूसरी गोली बाएं तरफ जांघ में लगी।

 

संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध नीलाब्जा चौधरी के मुताबिक, छह जनवरी को कठौता चौराहे पर मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना के पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अजीत सिंह की छह शूटरों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। इसमें मुख्य भूमिका वाराणसी के कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर उर्फ लोहार ने निभाई थी। उसने ही शूटरों का इंतजाम किया था। वारदात के बाद वह दिल्ली भाग गया था। 11 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था और 10 फरवरी को लखनऊ की कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। 11 फरवरी को विभूतिखंड पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में कस्टडी रिमांड की अर्जी दी। 12 फरवरी को सुनवाई के दौरान 13 से 16 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए सीजेएम सुशील कुमारी ने रिमांड मंजूर की। शनिवार को कई राउंड पूछताछ की। रविवार देर रात तक पूछताछ के बाद उसने असलहा बरामद कराने के लिए हामी भरी। पुलिस रात करीब 2.30 बजे उसे लेकर खरगापुर को निकली थी।

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