
फतेहपुर: कस्बे के जैन सन्मति भवन में चल रहे आठ दिवसीय आनन्द महोत्सव के पांचवे दिन रविवार को भावलिंगी श्रमणाचार्य विमर्श सागर गुरुदेव के सानिध्य में भगवान का अभिषेक शांतिधारा आरती की गई। आचार्य ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान की पूजा निर्मल व स्वच्छ मन से करनी चाहिये।भगवान की आराधना आत्मा के निर्मल भावों के सिवाय अन्य कोई उपाय नही है।आत्म कल्याण के लिये प्रभु की आराधना सच्चे व पवित्र मन से ही करनी चाहिए।कर्मों का नाश करने के लिये इसके अलावा कोई दूसरा मार्ग नही है।शाम को आरती, गुरुवंदना,आरती की गई। 54 जोड़ों नें वेदमन्त्रों की गूंज और मंगल ध्वनि के बीच दाम्पत्य जीवन मे किया प्रवेश