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मौत के आईने में जिंदगी को पहचान कर एक खूबसूरत दुनिया बनाएं। क़मर अब्बास सिरसिवी

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लखनऊ : दुनिया की तमाम अश्या के वुजूद और हक़ीक़त पर कभी ना कभी सवालिया निशान लगते रहे हैं सिवाय मौत के। मौत को ये ख़ुसूसियत हासिल है कि मौत के वुजूद से वो लोग भी इंकार नहीं कर सके हैं जिन्होंने इस दुनिया के बनाने वाले के वुजूद पर सवाल खड़े किये हैं | मौत एक ऐसी शय है जो ज़िन्दगी की हक़ीक़त को दुनिया के सामने लाती रही है | जिसने मौत को समझ लिया, उसने दुनिया की हक़ीक़त को ख़ूब पहचाना और उसकी ज़िन्दगी कामयाब हुई | इसके बरअक्स जो मौत को नहीं समझ सका वो दुनिया भर की दर्सगाहों में भटकने के बावजूद ज़िन्दगी की हक़ीक़त को नहीं पहुंच सका और कामयाबी से दूर रहा | इंसानों का एक गिरोह जो मौत की हक़ीक़त से आशना नहीं हो पाता है, इस दुनिया की ज़िन्दगी को सब कुछ मानकर आरज़ी अश्या को अपनी हयात का मक़सद बना लेता है और इस दुनिया को ज़ुल्म से भरकर दूसरे इंसानों की ज़िन्दगी के लिए दुनिया को तंग कर देता है | इस गिरोह के लोग इस दुनिया और ज़िन्दगी के लिए पागलपन की हद तक बैचेन और बेक़रार रहते हैं और वो ज़िन्दगी के मक़सद को समझने की कोशिशों को छोड़कर सिर्फ दुनिया में बने रहने के लिए आबे हयात को अपनी ज़िंदगी का मक़सद बना लेते हैं | इन्हीं अफराद के ख़ौफ़नाक हाल ने समझदार इंसानों के लिए दुनियावी ज़िन्दगी की हक़ीक़त समझने के रास्ते को हमवार किया है | जब ऐसे लोग अपने ज़माने की तमाम अश्या को हासिल करने के बाद दुनिया की कामयाब समझी जाने वाली जमाअत में शामिल माने जाते हैं तब एकाएक मौत इन सब को उनके दुनियावी हासिल से दूर ले जाती है और ये ऐलान कर देती है कि इनका हासिल ए ज़िन्दगी इनके लिए किसी काम का नहीं है | यहीं से ज़िन्दगी पर ग़ौर ओ फिक्र करने वाले अफराद मौत के ज़रिये ज़िन्दगी को समझने की कोशिश शुरू करते हैं |

दुनिया की तारीख़ को इस नज़रिये से देखने पर ये कड़वी सच्चाई सामने आती है कि अपने अपने दौर में दुनियावी तौर पर कामयाब समझे जाने वाले अफराद तारीख़ी किताबों में चंद सतरों या बहुत हद तक चंद पन्नों में सिमट कर रह जाते हैं और आने वाली दुनिया उन्हें अक्सर ज़ालिम कहकर याद करती है |इनके बरअक्स दुनिया की अश्या को दूसरे इंसानों की ख़िदमत और बक़ा के लिए ज़रिया समझने वाले इंसान धीरे धीरे अपनी ज़िंदगी के मक़सद को पहचान और तलाश कर ख़ुद को कामयाबी के नज़दीक ले जाते हैं और दुनिया को ख़ुशियों से भर देते हैं | उनकी ज़िन्दगी पर क़िताब दर क़िताब लिखीं जाती हैं और आम इंसानों की ज़बानों पर इनके नाम बड़ी इज़्ज़त और एहतराम से लाये जाते हैं |

इन सब बातों को लिखने और याद दिलाने का एक ही मक़सद है कि उन सबसे मुहब्बत कीजिये, उन सबकी इज़्ज़त कीजिये जो आज के हौलनाक माहौल में भी बिना किसी लालच के, मीडिया की चकाचौंध से दूर, अपनी जान और माल की परवाह किये बग़ैर इंसानियत की ख़िदमत को अपनी ज़िन्दगी का मक़सद बनाये हुए हैं और उन सब से नफ़रत और परहेज़ कीजिये जो आज भी दुनिया में नफ़रत फैलाकर , इंसानों की मजबूरियों का नाजायज़ फायदा उठाकर अपनी दुनियावी तिजोरियों को भरने में दिन रात लगे हुए हैं | ऐसे तमाम लोग सोशल मीडिया पइंसानियत की बड़ी बड़ी बातें लिखते और कहते हैं लेकिन जब ज़मीनी हक़ीक़त सामने आती है तो हर रोज़ साथ रहने वाले इंसान की ज़िन्दगी की छोटी सी ज़रूरत भी पूरी नहीं करते हैं और हद तो जब हो जाती है जब उस इंसान की मौत किसी आम बीमारी से भी हो जाती है तो उसे कंधा देने तक से इंकार कर देते हैं | तो आईये मौत के आइने में ज़िन्दगी को पहचान कर, इंसानी मुहब्बत और ख़िदमत को फरीज़ा ए अव्वल मानकर दुनिया को सबके लिए एक ख़ूबसूरत जगह बनायें |

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