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सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन सिर्फ कागजों पर ओके धरातल पर लगा दीमक।

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गांवों में सामुदायिक शौचालय बनें शोपीस।

फतेहपुर84/उन्नाव : सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनवाया गया सामुदायिक शौचालय क्षेत्र की एक ग्रामपंचायत में महज शोपीस बनकर रह गया है।गांव के बाहर तलाबनुमा जमीन पर बनाया गया सामुदायिक शौचालय अब तक अधूरा पड़ा हुआ है।ग्रामप्रधान एवं ग्रामसचिव चहेतो की पर्सनल प्रापर्टी बनकर रह गया है सामुदायिक शौचालय। सुविधा के बावजूद ग्रामीण खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं।

भारत सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत चलायी जा रही तमाम महत्वाकांक्षी योजनाओ का प्रमुख घटक सामुदायिक शौचालय क्षेत्र की कई ग्रामपंचयतो में नाकारा साबित हो रही है।क्षेत्र में कमाई का जरिया बनी उक्त योजना के नमूने जगह जगह देखने को मिल जाते है।विकासखंड फतेहपुर चौरासी क्षेत्र की ग्राम पंचायत खेवरई में भी लाखों रुपए की लागत से बने सामुदायिक शौचालय के निर्माण में सरकारी धन का बंदरबांट किस प्रकार हुआ है यह मौके की दशा देखकर अंदाज लगाया जा सकता है।ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय का निर्माण होने के बावजूद इसका उपयोग ना के बराबर ही किया जा रहा है।ग्रामपंचायत में बने उक्त सामुदायिक शौचालय में पानी की कोई उचित व्यवस्था नही है पानी की टंकी शौचालय की छत पर रखी हुई है समर्सिबल  भी लगा हुआ है लेकिन शौचालय में बिजली की सप्लाई न होने के कारण पानी की टंकी हमेशा खाली रहती है।

उक्त सामुदायिक शौचालय के बाहर बने सेफ्टी टैंकों को पूर्णतया बंद भी नहीं किया गया है।ग्राम पंचायत में तालाबनुमा जमीन पर निर्मित कराये गये शौचालय के पूर्णतः बन्द नही कराये गये सेफ्टी टैंक साथ ही सामुदायिक शौचालय के आस पास लगे घूरे के ढेर बरसात के दिनों में ग्रामीणों के लिए समस्या बने हुए है।ग्रामीण हसीन   वशीम  शैफ  साकिब मल्हू  मुर्शिद  आदि ग्रामीणों ने बताया कि सामुदायिक शौचालय में नियुक्त केयर टेकर हमेशा ताला लगाए रखता है जो ग्रामप्रधान व ग्राम विकास अधिकारी के खास लोगो के लिए खुलता है उपयोग होने के बाद फिर बन्द हो जाता है।ग्रामीणों ने बताया ग्रामपंचायत ने नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी गांव आते ही नही है वही अधिकांश ग्रामीणों ने बताया कि वह ग्राम विकास अधिकारी को पहचानते ही नही है।ग्रामपंचायत में निर्मित उक्त सामुदायिक शौचालय की तमाम अनियमितताओ के चलते ग्रामीण भवन के बाहर ही मल मूत्र त्यागने को विवश हैं।

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