diwali horizontal

धूमधाम के साथ मनीं गांधी -शास्त्री जयंती

0 61

 

उरई (जालौन) माधौगढ़ तहसील में उपजिलाधिकारी अंगद यादव तहसीलदार सुशील कुमार सिंह अपने अधीनस्थों के साथ ध्वजारोहण कर गांधी -शास्त्री जयंती मनाई । वहीं थाना रामपुरा माधौगढ़ रेढर गोहन खंड विकास अधिकारी माधौगढ़ खंड शिक्षा अधिकारी माधौगढ़ खंड विकास अधिकारी रामपुरा खंड शिक्षा अधिकारी रामपुरा तथा अन्य सभी कार्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में धूमधाम के साथ गांधी -शास्त्री जी को याद किया गया। इसी क्रम में कस्वा में स्थित ऋषभ पब्लिक जूनियर हाईस्कूल के बच्चों ने नगर में रैली निकालते हुए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया।वहीं रामेश्वर धाम में साफ सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया।सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण कर जयंती मनाई।साम्प्रदायिक सद्भावना की स्थापना के लिए अपना जीवन समर्पण करने वाले महात्मा गांधी को दुनिया ने सराहा, स्वीकारा और विश्व शांति का अद्वितीय दूत माना। उन्होंने जीवन जीने का जो अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया, उसके लिए अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि आगे आने वाली पीढ़ियां मुश्किल से विश्वास कर पाएंगी कि कोई हाड़-मांस का ऐसा व्यक्ति भी इस पृथ्वी पर पैदा हुआ था। आज उसी भारत में न केवल उनके जीवन मूल्य और सिद्धांत भुलाए जा रहे हैं, बल्कि पंथिक विभेद बढ़ाने के लिए एक ऐसा वर्ग उभरा है, जो अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकता है क्या आज से सात दशक पहले इस बात की कल्पना की जा सकती थी कि गांधीजी का सर्वप्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजाराम पतित पवन सीताराम, ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबकी सन्मति दे भगवान’ हिंदुत्व के प्रचार प्रसार का आक्षेप झेलेगा? विचारणीय प्रश्न यह है कि गांधीजी के जीवन काल में उनकी दैनदिन सभाओं में नियमपूर्वक गाए जानेवाले किसी भजन का किसी धर्म के आधार पर विरोध कभी नहीं किया गया, जो अब हो रहा है। इस भजन को हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार के रूप में देखने वाली पीढ़ी कैसे और किन तत्वों द्वारा तैयार की गई है? इस बदलाव के क्या कारण हैं कि देश के राष्ट्रगान के रूप में संविधान सम्मत ‘वंदे मातरम्’ के अंश गाने पर भी कुछ लोगों को एतराज है 1909 में 40 वर्षीय युवा मोहनदास करमचंद गांधी का लिखा गया ‘हिंद स्वराज’ अपने प्रकाशन के समय कुछ ही लोगों का ध्यान आकर्षित कर पाया और उसमें से भी अधिकांश ने उसे अव्यावहारिक माना, परंतु आज विश्व जिन समस्याओं से जूझ रहा है, उन सबका समाधान ढूंढ पाने के लिए वही हिंद स्वराज आशा की किरण बनकर वैश्विक पटल पर उभर रहा है। जिस सभ्यता को उन्होंने राक्षसी कहा था, आज उसका विकराल रूप जलवायु संकट, जल संकट, गरीबी, भुखमरी, बीमारी, हथियारों के  निर्माण, संग्रहण एवं विक्रय की अंधी दौड़, हिंसा, अविश्वास, युद्ध इत्यादि के लगातार बढ़ते परिमाण पृथ्वी पर मानवता के बने रहने पर ही प्रश्न चिह्न लगा रहे हैं। गांधीजी के जाने के बाद उनके ही प्रशिक्षित किए गए लोग सत्ता में आए मगर उन गाँधीजी के मूल्यों सिद्धांतों को अपनाने का समय • फाइल सभी ने जैसा अंग्रेज चला रहे थे, उसे ही निरंतरता प्रदान करना अपना कर्तव्य मान लिया। गांधीजी की विकास और प्रगति की अवधारणा को नकार दिया। भारत ने विज्ञान, तकनीकी प्रबंधन, अंतरिक्ष, कृषि चुकी थी। इत्यादि अनेक क्षेत्रों में बड़ी सफलताएं प्राप्त की, लेकिन जो मानवीय गरिमा गांधीजी हर व्यक्ति को देना चाहते थे, विशेषकर उन्हें जो सैकड़ों वर्षों से सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दुराव और पीड़ा झेल रहे थे, वह उनको मिल नहीं सकी पश्चिम की सभ्यता का अंधानुकरण और विदेशी शासकों के प्रति भक्ति भाव के रहते यह संभव था ही नहीं ‘गांव, गरीब और गांधी’ के प्रति न तो कभी गहराई से विमर्श हुआ और न ही उनके नाम पर बनी योजनाओं के ईमानदार क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया। इस सबका परिणाम यह हुआ कि भारत में गांधी और उनके विचार नेपथ्य में चले गए गांधी ने जिस स्वतंत्र भारत की संकल्पना की थी, उसमें उनके द्वारा प्रतिपादित और उनके स्वयं तथा अनगिनत अनुयायियों द्वारा व्यवहार में लाए गए मूल्य अब कहाँ हैं? कुछ राज्य सरकारों ने तो गांधीजी का चित्र अपने सरकारी दफ्तरों और संस्थानों से भी हटा दिया है। यह भी कैसी विडंबना है कि सारी राजनीति ‘गांधी जी के पंक्ति के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति’ के हित के नाम पर ही की जाती रही, लेकिन वही सबसे ज्यादा उपेक्षित भी रहा। इसीलिए अब वह ऐसा विकल्प ढूंढ़ रहा है जिस पर विश्वास कर सके, जो व्यक्तिगत स्वार्थ से परे हो, जिसके मन मस्तिष्क में पंक्ति के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की ही प्राथमिकता हो, जो उनके घर, शौचालय, स्वास्थ्य, फसल, आमदनी की न केवल बात कर सके, वरन व्यावहारिक रूप से वहां तक पहुंचा भी सके झूठे वायदों से ऊबा हुआ मतदाता उन सबको पहचान चुका है, जो सेब दूध बेचकर और न जाने क्या- क्या करके सत्ता में आकर कुछ वर्षों में ही अरबपति खरबपति बन गए, जिनकी संतानें जन्म से ही न केवल करोड़ों अरबों की संपत्ति की उत्तराधिकारी बन गई, बल्कि उन्हें सत्ता तक विरासत में मिल गई। यही नहीं, अपने को प्रबुद्ध वर्ग कहने वाले, सिविल सोसायटी के नाम से समय-समय पर पुरस्कार लौटनेवाले या पत्र लिखकर एक विचारधारा विशेष का संपोषण करने वाले विशिष्ट जन यह सब देखते रहे, मगर बोले कुछ नहीं क्या यह अप्रत्याशित था? नहीं, क्योंकि गांधी की दूरदृष्टि इस संभावना को देख
स्वतंत्रता के पहले एक बार गांधी जी से पूछा गया कि उनके अनुसार भारत की सबसे बड़ी समस्या क्या है? गांधी जी का उत्तर था, बुद्धिजीवियों की उदासीनता उनके समक्ष केवल उनकी अपनी समस्याएं ही सदा महत्वपूर्ण बनी रहती हैं। जैसे मैं कुलपति कैसे बनूं? वह बन गया, मैं क्यों नहीं। मेरी पुस्तक पर ही पुरस्कार कैसे मिले? इत्यादि । यह उदासीनता देश को बहुत महंगी पड़ी है। चुनौती यह है कि नई पीढ़ी को सही मानवीय मूल्य देने का उत्तरदायित्व तो विद्वानों और आचार्यों का ही होता है यदि यह वर्ग भी गांधी की प्रासंगिकता को समझ ले तो भारत नई दिशा में अधिक तेजी से अग्रसर हो सकेगा, जिसमें हर व्यक्ति ‘सर्व भूतहिते रताः’ को जीवन में उतरने की दिशा में आगे बढ़ेगा। यह असंभव नहीं है। गांधीजी भी यही चाहते थे।वहीं शास्त्री जी ने भी देश के लिए त्याग और समर्पण किया वह कभी नहीं भुलाया जा सकता है।ऋषभ पब्लिक जूनियर हाईस्कूल के बच्चे गगन भेदी नारे लगाते हुए गांधी स्मारक पर पहुंचे वहां विद्यालय के संचालक एडवोकेट अखिलेश कुमार सविता ने गांधी जी पर माल्यार्पण किया।इस मौके पर शत्रुघन सिन्ह मंडल अध्यक्ष बंटी नेता कोमल सिंह दीपक कुमार महेश कुमार वर्मा सुषमा सविता राखी स्वर्णकार ऋषभ राज निधि राज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डकोर के नवनिर्मित भवन में चिकित्सा सेवाओं के संचालन का फीता काटकर मा० सदर विधायक गौरी शंकर वर्मा ने लोकार्पण किया। उन्होंने संपूर्ण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का अवलोकन किया साथ ही केंद्र पर चिकित्सा संस्थानों से सुसज्जित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जनपद में चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है जिसमें समुदाय के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी व मुख्यमंत्री के प्रेरणा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया है उन्होंने कहा कि हमारी सरकार गरीब के उत्थान के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आशा बहुएं समुदाय से जुड़कर आमजन को स्वास्थ्य योजनाओं व सुविधाओं से अवगत करा उन्हें लाभान्वित कराएंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के निवासियों खासकर ग्रामीण अंचल के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा होने से लोगों को कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी यहां पर उपचार हेतु सुविधाएं उपलब्ध है। जिलाधिकारी चाँदनी सिंह ने कहा कि माननीय विधायक जी के प्रयास से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण व शुभारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अधिक से अधिक आशाओं द्वारा डिलीवरी कराई जाए। उन्होंने कहा कि दवाई की उपलब्धता लैब में सभी प्रकार की जांच व डॉक्टरों की उपस्थिति रहेगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अच्छा इलाज किया जाएगा अब कहीं बाहर जाने की नौबत नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही डॉक्टरों के रहने के लिए आवास की व्यवस्था कराई जाएगी ताकि नियमित चिकित्सक रह सके। सामुदायिक चिकित्सालय में वार्ड सहित अन्य सभी सुविधाएं हैं। उसके बाद सदर विधायक व जिलाधिकारी ने परिसर के अंदर हरिशंकरी पौधरोपण भी किया इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर नरेंद्र देव शर्मा आदि चिकित्सक मौजूद रहे।
Leave A Reply

Your email address will not be published.