
भीषण गर्मी में बिजली व्यवस्था पर मंडराया संकट, उपभोक्ता होंगे परेशान
उत्तर प्रदेश:उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन रुकने के नाम नहीं ले रहा है। अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार कर रहे संविदाकर्मियों के साथ अब नियमित कर्मचारी भी आ गए हैं। इन सबने आंदोलन को तेज कर दिया है। नियमित कर्मियों ने निजीकरण को निरस्त करने की मांग को लेकर अब बहिष्कार की चेतावनी दे दी है। ऐसे में शहर की बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने की दहलीज पर है।जानबूझकर उपभोक्ताओं को महंगी बिजली के जाल में फंसाने के लिए आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं। समिति के मुताबिक, ऐसा पहली बार हुआ है जब एआरआर स्वीकार किए जाने के बाद आंकड़ों में फेरबदल किया गया।इससे पहले 22 मई से 28 मई तक सभी परियोजना कार्यालयों पर दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक तीन घंटे का विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहना है कि पूरे प्रदेश में विरोध कार्यक्रम चलाया जाएगा और 29 मई से संघर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगा।यह दर तब लागू होगी जब चार साल बाद प्लांट से बिजली मिलनी शुरू होगी। पूर्वांचल और दक्षिणांचल वितरण निगमों के निजीकरण के लिए ग्रांट थॉर्टन को अवैध तरीके से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है। यह वही कंसल्टेंट है जो मिर्जापुर में प्रस्तावित अडानी पावर प्लांट से जुड़ा है। इस कारण हितों के टकराव का मामला भी साफ नजर आता है। निजीकरण के बाद बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी तय है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) और इसके सहयोगी निगमों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारी मंगलवार से 72 घंटे के कार्य बहिष्कार पर चले गए हैं। आंदोलनकारियों ने यह फैसला समस्याओं की लगातार अनदेखी, 55 वर्ष की उम्र का हवाला देकर की जा रही सेवाओं की समाप्ति, वेतन में भेदभाव, और ईपीएफ घोटाले जैसे मुद्दों के विरोध में लिया है