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बीबीएयू में जैव प्रौद्योगिकी पर व्याख्यान, प्रो. कन्नन बोले— यह है अवसरों और चुनौतियों का युग कुलपति प्रो. मित्तल ने ‘ब्रेन गेन’ की आवश्यकता पर दिया जोर

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बीबीएयू में जैव प्रौद्योगिकी पर व्याख्यान, प्रो. कन्नन बोले— यह है अवसरों और चुनौतियों का युग
कुलपति प्रो. मित्तल ने ‘ब्रेन गेन’ की आवश्यकता पर दिया जोर

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 21 मई को “कमेटी फॉर एमीनेंट लेक्चर सीरीज” के अंतर्गत व्याख्यान माला के द्वितीय सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नागालैण्ड केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. कृष्णमूर्ति कन्नन मुख्य वक्ता रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मंच पर डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू और कमेटी की अध्यक्ष प्रो. शिल्पी वर्मा भी मौजूद रहीं।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब के चित्र पर पुष्पांजलि से हुई। इसके पश्चात मुख्य अतिथि एवं शिक्षकों का पुष्पगुच्छ और पुस्तक भेंट कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिखा तिवारी ने किया, जबकि प्रो. शिल्पी वर्मा ने आयोजन की भूमिका और उद्देश्य प्रस्तुत किए।कुलपति प्रो. मित्तल ने अपने संबोधन में जैव प्रौद्योगिकी को समाज कल्याण का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि इसके जरिये सस्ती दवाएं, प्रभावी टीके, रोगों की त्वरित पहचान, स्वच्छ जल और पोषणयुक्त खाद्य जैसी सुविधाएं आमजन तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि देश में कार्यरत वैज्ञानिकों को वापस लाने के लिए “ब्रेन गेन” योजना जैसे प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि भारतीय प्रतिभा देश में ही सामाजिक और वैज्ञानिक विकास का आधार बन सके।मुख्य वक्ता प्रो. कृष्णमूर्ति कन्नन ने ‘A Tale of Two Biotechnologies: It was the best of times, it was the worst of times’ विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि जैव प्रौद्योगिकी एक ओर जहां निदान, जीन आधारित चिकित्सा, खाद्य सुरक्षा और औद्योगिक नवाचार में अग्रणी है, वहीं दूसरी ओर यह नैतिक दुविधाओं, सुरक्षा जोखिमों और लागत जैसी चुनौतियों से भी घिरा हुआ है।उन्होंने माइक्रोस्कोपी जैसे उपकरणों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया जो रोगों के निदान में सहायक होते हैं। साथ ही उन्होंने बायोकेमिस्ट्री के इतिहास, डीएनए की खोज, इलेक्ट्रोफोरेसिस, क्रोमैटोग्राफी जैसी तकनीकों की वैज्ञानिक यात्रा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज जैव प्रौद्योगिकी सूचना आधारित विज्ञान बन चुकी है और यह विश्वविद्यालयों के लिए उद्यमिता का माध्यम भी बन रही है।प्रो. कन्नन ने आधुनिक जैव प्रौद्योगिकीविद् की तुलना एक गणितज्ञ से की—जो मानव कल्याण हेतु अणुओं का जोड़-घटाव और गुणा-भाग करता है।प्रो. एस. विक्टर बाबू ने जैव प्रौद्योगिकी के भविष्य और इससे जुड़ी संभावनाओं व चुनौतियों पर विचार रखे। व्याख्यान सत्र के दौरान शिक्षकों के प्रश्नों का उत्तर कुलपति और मुख्य वक्ता ने संयुक्त रूप से दिया।कार्यक्रम के समापन पर डॉ. सुनील बाबू गोसीपटाला ने सभी का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर कुलसचिव, विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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